दिल्ली एनसीआर में बढ़ा प्रदूषण का स्तर
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सर्दी व गर्मी में अलग-अलग दिशा से चलती है हवा
विशेषज्ञ बताते हैं कि गर्मी में हवा की दिशा पूर्व दिशा की ओर हो जाती है। ऐसे में गल्फ देशों व रेगिस्तान से आने वाली हवाएं अपने साथ धूल को लेकर आती हैं। इससे स्थानीय स्तर के साथ-साथ पड़ोसी देशों से भी प्रदूषण को बढ़ने में मदद मिलती है। वहीं, सर्दी में दिल्ली-एनसीआर पहुंचने वाली हवा उत्तर, उत्तर पश्चिम और पश्चिम से आती हैं। इस दौरान सतह पर चलने वाली हवा की चाल दो से तीन मीटर प्रति सेकंड तक पहुंच जाती है, जबकि गर्मी में यह 5-6 मीटर प्रति सेकंड रहती है। वातावरण के ऊपरी सतह पर चलने वाली ट्रांसपोर्टेशन हवा की चाल ज्यादा होती है। यही वजह है कि दूर के प्रदूषक दिल्ली-एनसीआर पहुंच जाते हैं, लेकिन सतह की हवाओं के सुस्त होने से यह दूर तक सफर नहीं कर पाते हैं।