नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह ने कथित तौर पर 2007-11 के दौरान सस्ती दरों पर बिजली के काम के लिए सात टेंडर जारी करने के बदले ठेकेदार से एमयूवी कार ली थी। चहेती कंपनी को ठेका सौंपने पर प्राधिकरण को 1.76 करोड़ का नुकसान हुआ था। मामले में सीबीआई ने कोर्ट में तीन अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं। सीबीआई ने यादव सिंह और अधिकारियों के अलावा, लाभार्थी कंपनी, सहायक परियोजना अभियंता रामेंदर सिंह और विमल कुमार मांगलिक, गुल इंजीनियरिंग कंपनी के जावेद अहमद पर भी आरोप लगाए हैं।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : Social Media
सीबीआई के प्रवक्ता आरके गौड़ ने बताया कि उच्च स्तर की विद्युत लाइनों की केबलिंग से जुड़े अनुबंध जावेद अहमद को उनकी कंपनी गुल इंजीनियर्स के बावजूद पर्याप्त दरों पर नहीं दिए गए थे। यादव सिंह सहित निविदा समिति के सदस्यों ने कथित रूप से वास्तविक बाजार दरों के माध्यम को जाने बिना फर्जी दरों को पास कर दिया था। सीबीआई ने 2007-08, 2008-09 और 2010-11 के लिए तीन अलग-अलग चार्जशीट दायर की हैं।
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नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन मुख्य अभियंता यादव सिंह का घर
- फोटो : सोशल मीडिया
पहली चार्जशीट में 50.20 लाख रुपये के नुकसान से संबंधित है। इसमें आरोप है कि 2007-08 के दौरान यादव सिंह और अन्य अधिकारियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत अहमद की कंपनी को तीन टेंडर जारी किए थे। फीडर लाइन बिछाने, फ्लाईओवर के विद्युतीकरण कार्य और 33-केवी और 11 की शिफ्टिंग के लिए कंपनी को टेंडर जारी किया था। आरोप है कि यादव सिंह, अहमद और अन्य नौ आरोपियों की मिलीभगत से 11 केवी भूमिगत फीडरों के निर्माण, अंडर ग्राउंड केबल डालने के लिए ओवरहेड का निर्माण कार्य करने के लिए दूसरा टेंडर जारी किया गया था। सीबीआई ने फरवरी में न्यायिक हिरासत में लेने के बाद दो अन्य मामलों में 17 जनवरी 2018 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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नोएडा अथारिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह
- फोटो : amar ujala
दूसरी चार्जशीट में यादव सिंह, अहमद और प्राधिकरण के तत्कालीन 10 अधिकारियों को कथित रूप से प्राधिकरण को 54.28 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाने के लिए नामित किया गया। आरोप है कि 2008-09 की अवधि के दौरान अभियुक्त लोकसेवकों ने आपराधिक षड्यंत्र करके निजी कंपनी के प्रोप्राइटर के साथ विद्युत लाइनों की शिफ्टिंग और 33 केवी लाइन की शिफ्टिंग से संबंधित दो अनुबंधों को स्वीकृत किया था।
तीसरी चार्जशीट में 72 लाख रुपये के हेराफेरी का आरोप है। इसमें बताया गया कि निजी कंपनी को यादव सिंह, अहमद और नौ अन्य आरोपी लोक सेवकों ने 11 केवी भूमिगत फीडरों के निर्माण और गुल इंजीनियर्स के लिए अंडरग्राउंड केबल बिछाने के लिए 33क केवी ओवरहेड लाइनों के निर्माण से संबंधित दो टेंडर जारी किए गए थे।