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रेनू की नहीं थी संतान, संजना में बसी थी जान, सूनी गोद भरने को मन्नत मांगने वैष्णो देवी गया था परिवार

Sat, 12 Oct 2019 06:38 PM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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बुलंदशहर में दर्दनाक हादसा - फोटो : अमर उजाला
बुलंदशहर के नरौरा पर हुए हादसे में मृत रेनू देवी (25) पत्नी जितेंद्र सिंह तथा उसकी पांच वर्षीय भतीजी संजना पुत्री कैलाश की मौत पर घर में मातम छाया हुआ था। रेनू देवी की सास लक्ष्मी देवी तो बहू और नातिन की खबर सुनने के बाद से ही बेसुध होकर कई घंटे जमीन पर पड़ी रहीं। परिवार के लोग रेनू की सूनी गोद भरने के लिए मन्नत मांगने वैष्णो देवी गया था।  
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मृतक रेनू का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
वहीं मासूम संजना की मां राजकुमारी का करुण क्रंदन भी मोहल्ले की खामोशी को चीरता हुआ शोक संवेदनाओं को झकझोर रहा था। रोती विलखती राजकुमारी कभी दरवाजे की ओर देखकर बेटी संजना को आवाज लगाती तो कभी देवरानी के रिश्ते में बंधी अपनी सगी छोटी बहन रेनू देवी को पुकारती। वहीं घर के अधिकांश आदमी सूचना मिलते ही नरौरा बुलंदशहर के लिये रवाना हो गये थे।
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मृतक का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
कस्बे के मोहल्ला अहेरिया निवासी जितेंद्र सिंह अपनी पत्नी रेनू देवी तथा पांच वर्षीय भतीजी संजना को लेकर ससुरालियों के साथ वैष्णो देवी यात्रा पर गये थे। शुक्रवार तड़के सुबह नरौरा पहुंचे तो आराम के लिये बस के पास ही लेट गए इस दौरान वहां पहुंची एक तीर्थयात्रियों की बस ने सोते हुए श्रद्घालुओं को रौंद दिया, जिसमें सात लोगों मौत की नींद सो गए। जिनमें जितेंद्र की पत्नी रेनू देवी व भतीजी संजना भी शामिल हैं। 

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
रेनू के देवर ओमप्रकाश ने बताया कि उसकी भाभी के मायके वाले हर साल गांव से बस द्वारा वेष्णोदेवी यात्रा पर जाते हैं। रेनू की गोद सूनी रहने पर उसकी मां कमलेश देवी ने मन्नत मांगी थी। इसलिए 3 अक्तूबर को वह रेनू और जितेन्द्र को अपने साथ बस से वैष्णो देवी दर्शन को लेकर गए थे। राजकुमारी की गोद में छह माह की नवजात पुत्री थी जिसकी वजह से राजकुमारी और कैलाश यात्रा पर नहीं जा सके। लेकिन संजना को रेनू अपने साथ लेकर चली गई थी। 
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विलाप करते हुए परिजन - फोटो : अमर उजाला
रेनू पर नहीं थी संतान, संजना में रहती थी जान..
परिवार के मुखिया देवेंद्र सिंह ने बताया कि उनके चार बेटे किशन, कैलाश, जितेन्द्र व ओमप्रकाश तथा एक बेटी हेमलता है। कैलाश तथा जितेन्द्र की शादी 10 फरवरी 2015 को हाथरस जिले के मोहनपुरा गांव की दो सगी बहनों राजकुमारी तथा रेनू देवी पुत्रीगण सुखराम के साथ हुई थी। किशन तथा जितेन्द्र के कोई औलाद नहीं है। वहीं कैलाश की पत्नी राजकुमारी द्वारा संजना को जन्म देने के बाद से घर के सूने आंगन में किलकारी सुनाई दी। 
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद इन्हें दो बेटियां और पैदा हुई जिनमें दो साल की किट्टू तथा छह माह की काजल शामिल है। जबकि रेनू की कोख साढे़ चार साल बाद भी सूनी रही। संजना घर की सबसे बडी संतान थी इसलिए परिवार की लाडली थी लेकिन संजना से रेनू का लगाव कुछ ज्यादा ही था। अक्सर बाहर जाने पर वह उसे साथ लेकर जाती। बड़ी बहन राजकुमारी की गर्भावस्था के दौरान संजना के लालन पालन व देखरेख का भी रेनू पूरा ध्यान रखती थी। इसी लाड़ प्यार के कारण वह संजना को भी वैष्णो देवी के दर्शन के लिए साथ लेकर गई थी। हादसे के समय संजना रेनू के पास ही सो रही थी।
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