जहां एक ओर पूरे देश में नवरात्र की धूम है वहीं शिव के धाम जागेश्वर में ये विदेशी अनोखी साधना में जुटे हुए हैं। तस्वीरों में देखिए विदेशियों की साधना...
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yoga
जागेश्वर पहुंचे विदेशी साधन इन दिनों विश्वभर में शांति स्थापित करने के मकसद से साधना में अंर्तध्यान हैं।
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इन विदेशी मेहमानों समेत परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद महाराज मानते हैं कि जागेश्वर शांति का धाम है।
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यहां से लौटकर वह लोग दुनिया को बताएंगे कि आतंकवाद नहीं, अध्यात्मवाद है जीवन जीने का असली रास्ता। सभी का मानना है कि विश्वभर में शांति स्थापित करने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
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कुछ इस तरह साधना में डूबे हैं विदेश मेहमान।
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chidanand maharaj
जागेश्वर में हो रहे तीन दिवसीय योग महोत्सव में अमर उजाला से बातचीत में परमार्थ निकेतन ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद महाराज ने कहा कि दृष्टि बदलने से सृष्टि बदलती है। लड़कर थोड़ी जमीन तो जीत सकते हैं, लेकिन आध्यात्म पथ पर चलकर हम लोगों का जमीर तक बदल सकते हैं।
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alice
उन्होंने कहा कि अगली बार योग महोत्सव को पांच दिन बढ़ाने पर विचार होगा। इंग्लैंड की एलीस पहली बार जागेश्वर पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि वह पिछले तीन चार साल से योग सीख रही हैं। उनके देश में लोग कमरों के अंदर कुछ घंटे योग सीखते हैं, लेकिन भारत में 24 घंटे योग होता है।
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यहां शांति है सुकून है जो विश्व के अन्य देशों के लिए भी बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा आध्यात्मिक अनुभव उन्हें मेडिटेशन से मिलता है। जिसका अनुभव उन्हें जागेश्वर धाम आकर ही मिला।
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john
ऑस्ट्रेलिया निवासी 50 वर्षीय जॉन दूसरी बार जागेश्वर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि योग शारीरिक, मानसिक और आत्मा में बदलाव लाता है। वह 35 सालों से योग कर रहे हैं और उनके देश ऑस्ट्रेलिया में भी पिछले 10 सालों में योग के प्रति क्रेज बढ़ा है। वे लोग योग से शांति का अनुभव करते हैं।
परमार्थ निकेतन की साध्वी भगवती सरस्वती कहना है कि 20 सालों में उन्हें योग से वह सब कुछ मिला जो जीवन जीने के लिए जरूरी है। विदेशों में सब सुविधाएं हैं, लेकिन मन की शांति आध्यात्मिक केंद्रों में आकर ही मिलती है। विदेशी मेहमानों ने जागेश्वर को अद्भुत शांति की जगह बताते हुए कहा कि यहां के मंदिरों में जो दिव्यता है वह कहीं और नहीं है।