फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व नदी दिवस: अपने मायके में ही मुरझा रहीं देवभूमि उत्तराखंड की नदियां, तस्वीरों में देखें...

Sun, 26 Sep 2021 03:48 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 8
हरिद्वार में गंगा - फोटो : अमर उजाला
देवभूमि उत्तराखंड गंगा-यमुना जैसी नदियों का मायका है। दुर्भाग्य की बात यह है कि मायके में ही नदियों की दुर्दशा हो रही है। प्रदेश की सभी नदियों का हाल बुरा है। अधिकांश नदियों में नाले-परनाले और सीवर का गंदा पानी सीधे उड़ेला जा रहा है। कहीं-कहीं तो अवैध कब्जेदार नदियों की गर्दन ही मरोड़कर उसकी जमीन पर काबिज हो गए हैं।

विश्व नदी दिवस आज: लाखों टन कचरा ढोती उत्तराखंड की नदियों के अस्तित्व पर संकट, तस्वीरों में देखें 

यह सब-कुछ सरकार-शासन-प्रशासन की आंख के सामने होता है। इसके बाद भी नीति निर्माता नहीं जागते। नमामि गंगे जैसी योजनाएं भी नदियों का दामन मैला होने से नहीं बचा पा रहीं हैं। देहरादून में कभी बिंदाल और रिस्पना सदानीरा थीं। अब गंदे नाले में तब्दील हो चली हैं। कई जगह नदियों की जमीन पर ही अवैध बस्तियां उग आई हैं। जिला मुख्यालय उत्तरकाशी में ही भागीरथी नदी में घरों का गंदा पानी और नालों का पानी गिर रहा है।
विज्ञापन

2 of 8
टिहरी में भिलंगना नदी - फोटो : अमर उजाला
उत्तरकाशी में वाल्मीकि बस्ती के पास भागीरथी नदी में घरों का गंदा पानी नालियों से होकर सीधा नदी में जा रहा है। नई टिहरी के घनसाली क्षेत्र में भिलंगना नदी किनारे जगह-जगह गंदगी पसरी हुई है। 
विज्ञापन

3 of 8
ऋषि गंगा के दोनों ओर खाई - फोटो : अमर उजाला
चमोली में शांत और निश्च्छल बहने वाली ऋषि गंगा अब दुर्दशा का शिकार हो गई है। नदी के दोनों ओर खाई बनी हुई है। रैणी आपदा के बाद धौली गंगा में आया मलबा और गाद साफ नहीं हो पाया है।

4 of 8
हरिद्वार में गंगा में गंदगी - फोटो : अमर उजाला
हरिद्वार में भी तमाम दावों के बावजूद गंगा में गंदगी डालने के आदेश सरकारी फाइलों तक सिमट गए हैं। ऊधमसिंह नगर की कल्याणी नदी में पानी से ज्यादा कूड़ा बह रहा है। पिथौरागढ़ में काली नदी गंदगी की वजह से काली ही दिखती है।
विज्ञापन

5 of 8
सबसे ज्यादा संकट लोहावती नदी पर - फोटो : अमर उजाला
चंपावत में सबसे ज्यादा संकट लोहावती नदी पर है। शहर के ज्यादातर इलाके का कचरा नदी में समा रहा है। अल्मोड़ा में कोसी के सोमेश्वर क्षेत्र में कचरा निस्तारण की कोई व्यवस्था न होने के कारण लोग कोसी नदी में कचरा डाल रहे हैं।
विज्ञापन

6 of 8
बागेश्वर में गरुड़ में कूड़ा डालना आम - फोटो : अमर उजाला
रामगंगा भी गंदगी से पटी है। बागेश्वर में गरुड़ और कपकोट में नदियों में कूड़ा डालना आम है। सरयू और गोमती नदी में कूड़ा डाला जाता है। नैनीताल की शिप्रा नदी में प्रदूषण का स्तर अत्यधिक बढ़ा है।
विज्ञापन

7 of 8
गौला नदी - फोटो : अमर उजाला
हल्द्वानी के लोगों की प्यास बुझाने वाली गौला नदी स्वच्छ और निर्मल नहीं रह गई है। रानीबाग में चित्रशिलाघाट पर शवदाह की वजह से इसका पानी दूषित हो रहा है। 
विज्ञापन

8 of 8
पर्यावरण पर बुरा प्रभाव - फोटो : अमर उजाला
भारत सहित दुनिया के ऊंचाई वाले इलाकों में अनियंत्रित मानवीय हस्तक्षेप से पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अनियोजित पर्यटन से पर्यटक इन ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जाकर प्लास्टिक कचरा साथ ले जाते हैं और वहीं छोड़ जाते हैं। जो लंबे समय तक नष्ट नहीं होता। इसका प्रभाव वहां की मिट्टी पर पड़ता है। मिट्टी की परत में अवरोध पैदा होने से वर्षा का पानी जमीन के अंदर नहीं पहुंच पाता है। जिसका असर ग्लेशियरों पर पड़ा है।
-चंडी प्रसाद भट्ट, पर्यावरणविद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें