वहीं, बदरीनाथ हाईवे के लामबगड़ के पास खचड़ा नाले में बार-बार मलबा आने से हाईवे बाधित हो जाता है, जिससे तीर्थयात्रियों के साथ ही स्थानीय लोगों और सेना के जवानों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब बीआरओ ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए लामबगड़ में पुल बनाने का निर्णय लिया है।
पुल बनने से नाले में पानी बढ़ने या मलबा आने पर यातायात बाधित नहीं होगा। लामबगड़ के खतरनाक स्लाइड जोन के 400 मीटर हिस्से का स्थायी ट्रीटमेंट किया जा चुका है, जिससे इस जगह पर मार्ग बंद नहीं होता है, लेकिन इसके पास ही खचड़ा नाला सिरदर्द बना हुआ है। नाले में पानी बढ़ने से बार-बार हाईवे बाधित हो जाता है।
ऐसे में कई बार लोगों को जेसीबी की मदद से यहां रास्ता पार कराया जाता है। इस समस्या को देखते हुए बीआरओ ने लामबगड़ में पुल बनाने का निर्णय लिया है। बीआरओ के कमांडर मनीष कपिल का कहना है कि समस्या को देखते हुए लामबगड़ में पुल निर्माण किया जाएगा, जिससे बरसात के दिनों में निरंतर वाहनों की आवाजाही होती रहे।
रैणी गांव के पास लगा अर्ली वार्निंग सिस्टम
उधर, रैणी गांव के पास भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाले बैली ब्रिज के पास एसडीआरएफ ने अर्ली वार्निंग सिस्टम को फिर से स्थापित कर दिया है। पहले यह सिस्टम बैली ब्रिज से करीब 100 मीटर आगे ऋषि गंगा नदी के पास लगाया हुआ था। ऋषिगंगा में पानी बढ़ने से सिस्टम के बहने की आशंका बनी हुई थी, जिसके चलते एसडीआरएफ ने उसे वहां से हटा दिया था।
एसडीआरएफ के निरीक्षक विनोद गौड़ ने बताया कि अर्जी वार्निंग सिस्टम मलबे के ढेर के ऊपर लगे होने से उसके बहने की आशंका बनी हुई थी। अब इसको सुरक्षित जगह पर लगा दिया गया है। इस सिस्टम से ऋषि गंगा में बाढ़ आने की सूचना समय रहते मिल सकेगी।