बुधवार सुबह निर्धारित समय सात बजे से दो घंटे देरी से सेना के ट्रक में सेना के अधिकारी शहीद देव बहादुर का पार्थिव शरीर लेकर उसके आवास पहुंचे तो शहीद की पार्थिव देह की प्रतीक्षा कर रहे पिता शेर बहादुर, मां लक्ष्मी, बहन गीता, भाई अनीता और भाई अनुज की नम आंखों से अश्रुधारा बह निकली।