हरिद्वार में गंगा स्नान
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यदि निधन का दिन नहीं मालूम हो तो पिता का श्राद्ध अष्टमी और मां का नवमी पर किया जाना चाहिए। जिनकी मृत्यु हादसे, आत्मघात या अचानक हुई हो, उनके लिए चतुदर्शी का दिन होता है। साधु-संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी पर होता है। जिनके बारे कुछ मालूम नहीं, उनका श्राद्ध अंतिम दिन अमावस पर किया जाता है।