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Corona virus: खुद को घरों में कैद कर लीजिए, सरकार के सामने हैं कई चुनौतियां

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भारत से ज़्यादा संपन्न होने के बावजूद ये देश इस वायरस को रोक नहीं पाए। - फोटो : self
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कोरोना वायरस अब भारत में भी विकराल रूप लेने लगा है। इस हफ्ते में जिस तरह इसके संक्रमितों की संख्या बढ़ी है उसे देखते हुए इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर हमने सावधानी नहीं बरती तो आने वाले दिनों में हमारी भी हालत चीन, अमेरिका, इटली और फ्रांस जैसी हो सकती है। 

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भारत से ज़्यादा संपन्न होने के बावजूद ये देश इस वायरस को रोक नहीं पाए। इसके प्रसार को देखते हुए हमारे पास सिर्फ और सिर्फ एक ही रास्ता बचता है खुद को आइसोलेट करना। क्योंकि, अगर भारत में यह वायरस विकराल रूप लेता है तो वर्तमान में सरकार की तैयारियों और देश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को देखते हुए इसे रोकना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। 

सरकार इसे लेकर कितना चिंतित हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में पहला मामला 30 जनवरी को ही सामने आ गया था उसके बावजूद मास्क और वेंटिलेटर का निर्यात 19 मार्च तक जारी रहा। यहीं नहीं सरकारी स्तर पर संक्रमित लोगों को आइसोलेट या क्वारन्टीन करने की भी कोई तैयारी नहीं हुई। तैयारियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब देश में कुल 200 मामले भी सामने नहीं आए थे सरकार ने लोगों को आइसोलेशन और क्वारन्टीन का खर्च खुद उठाने का रास्ता तैयार कर दिया।

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देश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से खस्ताहाल है। - फोटो : self
प्राइवेट अस्पतालों को गाइडलाइन जारी कर सरकार ने इसकी फीस भी तय कर दी जो खुद संक्रमित व्यक्ति के परिवार को उठाना है। कई जगह से मरीजों के अस्पताल से भागने की ख़बर तो पहले से आ ही रही थी, जेब पर बोझ बढ़ने की डर से अब काफी लोग इसे छिपाने भी लगेंगे जिसका दुष्परिणाम सभी को भुगतना पड़ सकता है। 

देश में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से खस्ताहाल है। बिहार में तो आलम यह रहा कि युवक की मौत के बाद ही पता चल सका कि वह कोरोना से संक्रमित था। वर्तमान में देश में 84000 लोगों पर सिर्फ एक आइसोलेशन बेड की व्यवस्था है। 11600 लोगों पर एक डॉक्टर और 1826 लोगों पर महज़ एक अस्पताल बेड है।

सैंपल टेस्टिंग के मामले में भी भारत अभी काफी पीछे है। ऐसे में अगर यह महामारी भारत में विकराल रूप लेती है तो 1918 से भी बद्दतर स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। बता दें कि 1918 की महामारी में भारत में लगभग दो करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। 

भारत एक बहुत बड़ी आबादी वाला देश है। यह संक्रमण जिस तेजी से फैल रहा है उसे रोकना अब आसान  नहीं है। इसके लिए एक मात्र रास्ता खुद को घरों में कैद कर लेना ही है। हालांकि इतनी बड़ी आबादी के लिए अचानक से ऐसा करना आसान तो नहीं है लेकिन इसे नामुमकिन भी नहीं कहा जा सकता। इसका उदाहरण सबने जनता कर्फ्यू को सफल बनाकर दे दिया है। हालांकि, उस दिन शाम में पांच बजे ताली और थाली बजाने के चक्कर में जिस तरह बड़ी मात्रा में लोगों ने सड़क पर इकट्ठा होकर 'कोरोनोत्सव' मनाया उसने दिन भर के किए कराए पर पानी फेर दिया।
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भारत के लिए पहला हफ्ता बहुत चुनौती वाला होगा.
सोमवार को भी लॉक डाउन के पहले दिन जिस तरह देश भर में इसका उल्लंघन देखने को मिला उससे हमारी चिंता एक बार फिर लाज़िम हो जाती है। दुनिया के तमाम देशों में जिस तरह समय के साथ इस वायरस ने अपना पैर फैलाया है उसको देखते हुए भारत के लिए मार्च का आख़िरी सप्ताह काफी अहम हो गया है। अगर इस एक हफ़्ते में हमने खुद पर काबू कर लिया तो हम इस वायरस को मात दे सकते हैं। वरना यह इतना विकराल रूप ले लेगी जिसकी कल्पना तक हम नहीं कर सकते। 

भारत पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आज प्रधानमंत्री ने इस ओर इशारा भी कर दिया है कि आपात स्थिति में देश के उद्योगपतियों से आर्थिक मदद ली जा सकती है। वित्तीय व्यवस्था पहले ही गर्त में जा चुकी है। रही सही कसर कोरोना ने पूरी कर दी है। ऐसे में हमें जान-माल का बहुत भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आपात स्थिति से निपटने के लिए भारत के पास मुद्रा कोष का भंडार भी काफी कम है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नेपाल जैसा छोटा राष्ट्र जो खुद भी आंशिक रूप से कोरोना वायरस से प्रभावित है और भारत सरकार को 10 करोड़ की आर्थिक मदद दे रहा है।

रिजर्व बैंक के रिजर्व कोष से सरकार पहले ही एक बड़ी राशि ले चुकी है। ऐसे में अगर स्थिति बिगड़ती है तो हमें इससे उबरने में सालों लग जाएंगे। इन सब से बचने का एकमात्र उपाय यह है कि हमें खुद को घरों में कैद करना होगा। इस मुश्किल घड़ी में सभी को एक साथ मिलकर डटे रहने की जरूरत है ताकि इस महामारी के व्यापक नुकसान से बचा जा सके।  
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।      
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