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सुरों से सुरमयी हुई महामना की बगिया

Tue, 20 Dec 2016 10:32 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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मिश्रा बंधुओं की जोड़ी से सुरमयी हुई शाम - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में चल रहे संस्कृति महोत्सव के चौथे दिन का शाम सुमधुर स्वरों की चासनी में डूब गया। मंगलवार की शाम महामना की बगिया में बनारस घराने के जाने-माने ख्याल गायक मिश्र बंधुओं की जोड़ी , पद्मभूषण डॉ. एम राजम की वायलिन और निजामी बंधुओं ने जब अपनी प्रस्तुति दी तो दर्शक झूम उठे। 
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वायलिन की मिठास की पर्याय बन चुकी पद्मभूषण डॉ. एम राजम - फोटो : अमर उजाला
वायलिन की मिठास की पर्याय बन चुकी पद्मभूषण डॉ. एम राजम ने सधे अंदाज में छोटी-छोटी गतों पर लयकारी से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींचा।
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निजामी बंधु की कव्वाली से शाम हुई खुशरंग - फोटो : अमर उजाला
 सूफी संगीत के उस्ताद निजामी बंधु ने साम में चार चांद लगा दिया। एक से बढ़कर एक कव्वाली सुनाकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

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संस्कृति महोत्सव के मुरीद हुए विदेशी - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू में चल रहे संस्कृति महोत्सव का चौथे दिन शाम को हुई इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए पूरा सभागार खचाखच भरा रहा। संस्कृति महोत्सव में बड़ी मात्रा में विदेशी सैलानी आ रहे हैं। 
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संगीत प्रेमी पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह के हाल में कई बार इतरा उठे। - फोटो : अमर उजाला
बनारस घराने के जाने-माने ख्याल गायक मिश्र बंधुओं की जोड़ी ने मंगलवार की शाम महामना की बगिया में सुमधुर स्वरों की चासनी से चार चांद लगा दिया। घरानेदार बंदिशें, मोहक अलापचारी और गमक के साथ जब उन्होंने स्वरों का समन्वय किया तो संगीत प्रेमी पंडित ओंकारनाथ ठाकुर प्रेक्षागृह के हाल में कई बार इतरा उठे। 
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संस्कृति महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
गोपाल दास नीरज की रचना ‘अपनी बानी प्रेम की बानी’ प्रस्तुत किया, जिस पर लोगों ने तालियां बजाकर उनका जोरदार स्वागत किया। तबले पर किशोर मिश्र, हारमोनियम पर जमुना बल्लभदास गुजराती और तानपुरे पर शुभंकर डे ने संगत किया। इसके बाद मंच पर आई एम राजम ने वायलिन पर एक के बाद एक बंदिश गाया।  अंतिम प्रस्तुति वैष्णव जन तो तेने कहिए की प्रस्तुति पर तो लोग झूम उठे।
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संस्कृति महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
राग पुरिया में बोल ‘पिया गुणवंत’ से कार्यक्रम की शुरूआत करने के बाद मिश्र बंधु ने राधा-कृष्ण के प्रेम पर आधारित गीत ‘मै तो करि आई पिया संग रंग रेलिया’ और ‘पिया संग लागी लगन की’ गाया तो पूरा सभागार तालियाें की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। राग सोहनी में ‘आई री चतुर नवेली खेलो बसंत’ गाकर लोगों को बंसत ऋतु की याद दिला दी। 
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