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Photos: एक ऐसी जगह, जहां मिली भगवान विष्णु के 5वें वामन अवतार की प्रतिमा

Sun, 28 Jan 2018 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, तोशाम(भिवानी)
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भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा
देश में एक जगह पर भगवान विष्णु के पांचवें वामन अवतार की लगभग आठ सौ फुट ऊंची प्रतिमा मिली है। यकीं नहीं होता तो खुद देखिए तस्वीरें।
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भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा
हरियाणा में ​भिवानी जिले के तोशाम में यह प्रतिमा मिली है, जो आठवीं से दसवीं शताब्दी के मध्य की मानी जा रही है। पहाड़ी पर लगे वायरलेस सिस्टम पर कार्यरत पुलिसकर्मियों द्वारा हाल ही में पानी की टंकियों को व्यवस्थित ढंग से रखने के लिए कुछ मलबा हटाया तो वामन अवतार की प्रतिमा निकली। पत्थरों पर बने दो शिलालेखों के बाद पहाड़ी की चोटी पर अब मलबे से त्रेता युग के प्रथम और भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा मिली है।
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भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा
वहीं, पहाड़ी पर इतनी प्राचीन प्रतिमा मिलना पहाड़ी की एतिहासिक तथ्यों को और मजबूत करता है। पुरातत्व विभाग की मानें तो प्रतिमा आठवीं से दसवीं शताब्दी के बीच की है। पुरातत्व विभाग के सहायक संरक्षक एसपी चालिया ने बताया कि वामन अवतार की प्रतिमा में जो पत्थर प्रयोग किया गया है, इससे स्पष्ट होता है कि यह प्रतिमा 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच की है।

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भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा
आस्था का केंद्र है मुंगीपा धाम
करीबन आठ सौ फुट ऊंची पहाड़ी धार्मिक एवं एतिहासिक इतिहास को समेटे हुए है। पहाड़ी पर बने बाबा मुंगीपा धाम तोशाम ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्र के लोगों की भी गहरी आस्था है।
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भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा
पहाड़ी पर था राजा पृथ्वीराज चौहान का किला
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों अभिलेखागार विभाग की टीम ने बाबा मुंगीपा धाम के आसपास पहाड़ पर बने पवित्र कुंडों व एतिहासिक स्थलों का दौरा किया और महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की थी। टीम को निरीक्षण के दौरान एक पत्थर पर शाही परिवारों के रहन-सहन को दर्शाने वाली रफ-पेंटिग मिली थी।
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भगवान विष्णु के वामन अवतार की प्रतिमा
पृथ्वीराज चौहान का किला इस पहाड़ी पर था
माना जाता है कि मध्यकाल में राजा पृथ्वीराज चौहान का किला इस पहाड़ी की चोटी पर था। सन् 1982 में हवाई जहाज के टकराने से ध्वस्त हो चुके किले के काफी अंश खत्म हो गए थे। कुछ अंश आज भी मौजूद हैं। इस पहाड़ी के मध्य में मौजूद ब्राह्मी लिपि के दो अद्भुत शिलालेखों का रहस्य अभी भी बरकरार है।
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