10 साल से सत्ता संभाल रही अकाली दल और भाजपा 'उड़ते पंजाब' को संभाल नहीं पाई और उसी धुंए में उलझ कर रह गई, देखिए हार के पांच बड़े कारण...
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प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल
- फोटो : File Photo
10 साल से सत्ता संभाल रही शिरोमणि अकाली दल और सहयोगी भारतीय जनता पार्टी की 2017 विधानसभा चुनाव में बड़ी हार होती दिख रही है। दोपहर 12 बजे तक के रुझान में कांग्रेस 91, अकाली+भाजपा 15 और आम आदमी पार्टी 35 सीटों पर आगे चल रही है। इससे ये तो बिल्कुल साफ हो गया है कि पंजाब की जनता ने इस बार बादल सरकार को नकार दिया है।
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पीएम मोदी और बादल
- फोटो : फाइल फोटो
ड्रग्स रहा एक अहम मुद्दा
पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 में मुख्य मुद्दा ड्रग्स और नशोखारी रहा। विरोधी लगातार आरोप लगते रहे कि पंजाब में ड्रग्स मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के बेटे और उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के संरक्षण में ही बिक रहें है।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के नेता रैलियों और भाषणों के जरिए लोगों को यह समझाने की कोशिश करते रहे कि पाकिस्तान से ड्रग्स भेजे जा रहे ड्रग्स को बादल सरकार नहीं रोक पा रही है। आप का कहना है कि पंजाब सरकार में मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया और सरवन सिंह फिल्लौर भी तस्करी में शामिल हैं। मजीठिया रिश्ते में पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साले हैं।
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10 साल एक सरकार से ऊब चुकी थी जनता
जब भी कोई पार्टी लंबे समय तक सत्ता में रहती है तो एक स्वभाविक प्रक्रिया के तहत वोटरों के एक धड़ा उससे नाराज होता है। लोग बदलाव चाहते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि नई पार्टी सत्ता में आएगी तो वह कुछ बेहतर काम करेगी। अकाली-भाजपा गठबंधन भी पिछले 10 साल से पंजाब में सत्ता में थी, इसलिए जनता बदलाव चाह रही थी।
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सुखबीर सिंह बादल के हाथ में सारी ताकत
अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार में मुख्यमंत्री तो प्रकाश सिंह बादल रहे, लेकिन असली कमान उनके बेटे सुखबीर बादल के हाथों में रही। कहा जाता है कि दूसरी बार के कार्यकाल में सुखबीर सिंह बादल पूरी तरीके से जनता से दूर हो गए। सुखबीर सिंह बादल ने मनमाने तरीके से फैसले लिए। सरकार में सहयोगी भाजपा भी आरोप लगा रही है कि अगर गठबंधन की हार होती है तो इसके लिए केवल और केवल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल और उनकी नीतियां ही जिम्मेदार होंगी।
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नवजोत सिंह सिद्धू की नाराजगी
विधानसभा से ठीक पहले सिद्धू दंपति यानि नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी डॉ नवजोत कौर भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस में चले गए। इसका भी चुनाव में बादल सरकार को खास नुकसान उठाना पड़ा। पंजाब की राजनीति में क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू और उनकी पत्नी नवजोत कौर सिद्धू की खास दखल मानी जाती है। सिद्धू की वजह से न केवल रैलियों में भीड़ जुटती है, बल्कि उनके नाम पर खासे वोट भी बरसते हैं।
अप्रवासी भारतीयों की बादल सरकार से नाराजगी
इस बार के पंजाब चुनाव में अप्रवासी पंजाबियों की काफी दखल दिखी। बड़ी संख्या में अप्रवासी पंजाबी अपने खर्चे पर राज्य में लौटे और बादल सरकार के खिलाफ प्रचार किया। अप्रवासी आरोप लगाते रहे कि बादल सरकार में बड़े पैमाने पर जमीनों पर कब्जे हुए। उनका कहना था कि वे विदेशों में पैसे कमाने जाते हैं, यहां उनकी जमीन-जायदादों पर कब्जे हो रहे हैं। अप्रवासी ये भी कहते रहे कि वे चाह कर भी राज्य में निवेश नहीं कर पाते हैं, क्योंकि इस काम में भी उन्हें बहुत दिक्कतें आती हैं।