फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Photos: समाधि में लीन हुए महंत चांदनाथ, सीएम योगी-खट्टर ने दिया कंधा

Tue, 19 Sep 2017 09:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
विज्ञापन
1 of 10
Mahant Chand Nath
बाबा मस्तनाथ मठ के दिवंगत महंत चांद नाथ ने अपना शरीर त्याग दिया है। उन्हे कंधा देने 3 राज्यों के सीएम पहुंचे, देखिए
विज्ञापन

2 of 10
आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
बाबा मस्तनाथ मठ के दिवंगत महंत चांद नाथ को साधु संतो के भारी जमावडे़ के बीच रविवार को समाधि में दी गई। विधि विधान के साथ नाथ संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक पहले महंत की पूजा अर्चना की गई। इसके बाद उन्हें शाम पांच बजे आसन मुद्रा में समाधिलीन किया गया।
 
विज्ञापन

3 of 10
आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
महंत सुमरनाथ ने बताया कि नाथ संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक महंत के पार्थिव शरीर की पूजा अर्चना की गई और बाद में चंदन की लकड़ी और चीनी के बीच करीब आठ फुट गहरे गड्ढे में आसन मुद्रा में स्थान दिया गया। समाधि स्थल पर कुछ समय बाद महंत चांदनाथ की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। 

4 of 10
आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
बाबा मस्तनाथ के देश भर में सात से आठ हजार डेरे हैं और उसमें हजारों की संख्या में साधु हैं। उन्होंने बताया कि नाथ संप्रदाय की परंपरा है कि जब उनके महंत शरीर त्यागते हैं तो उनका स्नान ध्यान कराया जाता है। इसके बाद उन्हें समाधि स्थल में बैठाया जाता है। 
विज्ञापन

5 of 10
Chand Nath Yogi passes away
इससे पहले मान, पीर, महंत, मानधारी आते हैं विधि विधान से पूजा कर महंत की समाधि तैयार की जाती है। समाधि स्थल के लिए आठ से दस फुट का गड्ढा खोदा जाता है और धरातल को मजबूत किया जाता है। गड्ढे में चंदन की लकड़ी रखकर उसे चीनी से भरा जाता है, इसी में आसन मुद्रा में महंत की देह को आसन दिया जाता है। 
विज्ञापन

6 of 10
Chand Nath Yogi passes away
बाद में इसे ऊपर से पक्का कर दिया जाता है और महंत की समाधि की पूजा अर्चना की जाती है। फिर किसी प्रयोजन पर समाधिलीन महंत की उनकी समाधि के ऊपर मूर्ति स्थापना करवा दी जाती है, जिसकी पूजा अर्चना होती रहती है।
विज्ञापन

7 of 10
Chand Nath Yogi passes away
यह है मठ का इतिहास 
मठ से जुड़े लोगों की मानें तो आठवीं शताब्दी में बाबा चौरंगीनाथ ने मठ की स्थापना की। इसके कुछ समय बाद ही मठ का अस्तित्व खत्म हो गया था। 17वीं शताब्दी में बाबा मस्तनाथ ने मठ का दोबारा से जीर्णोद्धार किया। तभी से नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार इसे चलाया जा रहा है। तब से लेकर अब तक महंत चांदनाथ मठ के सातवें उत्तराधिकारी के तौर पर गद्दी संभाल रहे थे। 

8 of 10
आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
बाबा मस्तनाथ को माना जाता था गुरु गोरक्षनाथ का अवतार 
बाबा मस्तनाथ को गुरु गोरक्षनाथ का अवतार माना जाता था। उन्होंने ही अस्थल बोहर मठ का जीर्णोद्धार किया। बताया जाता है कि वह 1764 में रोहतक जिले के कसरेंटी गांव में दिखाई दिए थे। सबला नाम का एक व्यापारी उन्हें अपने साथ ले गया और मस्त नाम दिया। वह शुरुआत से ही अपनी आध्यात्मिक शक्तियों के लिए जाने जाते थे। 

9 of 10
आसन मुद्दा में महंत चांदनाथ को दी गई समाधि
वह हमेशा अपने आंगन में ऋषियों की संगति में बैठे दिखाई देते। समय-समय पर मस्त की शक्तियों से उनके पिता को लगा कि वह एक सामान्य व्यक्ति नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों के साथ इन सभी घटनाओं पर चर्चा की और मस्त को कुछ संतों को सौंपने का फैसला किया। लेकिन वह किसी भी संत को नहीं खोज सके।
विज्ञापन

10 of 10
Chand Nath Yogi passes away
कुछ समय बीतने के बाद संत नर्मिनीथ ऐ संप्रदाय के अनुयायी ने गांव का दौरा किया। वह अनुयायी एक साधारण संत नहीं थे। इसके बाद मस्त उनके शिष्य बन गए और उनका नाम मस्तनाथ रख दिया गया। विभिन्न घटनाओं के बाद नर्मिनीथ ऐ संप्रदाय को अब नाथ पंथ के नाम से जाना जाता है। तब जाकर वह अस्थल बोहर में आ गए और आठवीं शताब्दी में चौरंगीनाथ द्वारा स्थापित मठ का जीर्णोद्धार किया।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें