एक जुलाई में देश में लागू हो गया एक टैक्स का सिस्टम यानी जीएसटी। पर क्या आप जानना चाहेंगे कि ये क्या है, कहां से आया और ये कैसे काम करेगा?
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15 से ज्यादा टैक्स खत्म हो गए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भाषा में जीएसटी यानी गुड एंड सिंपल टैक्स का असली नाम है गुड्स एंड सर्विस टैक्स(वस्तु एंव सेवा कर)। एक जुलाई से देश भर में इसे लागू कर दिया गया है। इसके लागू होते ही 15 से ज्यादा टैक्स से लोगों को निजात मिल गई। वहीं सरकार ने दोहरे जीएसटी मॉडल को अपनाया है, इसमें टैक्सेशन की निगरानी केंद्र और राज्य सरकारें दोनों करेंगी।
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कहां से आया जीएसटी
जीएसटी जैसे कर का आइडिया उस वक्त आया, जब देश के प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे और वित्त मंत्रालय संभाल रहे थे पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह। उन्होंने फरवरी 1986 में मोडिफाइड वैट (MODVAT) से परिचय कराया। यह काफी कुछ जीएसटी जैसा था। इसी ने एक टैक्स के सिस्टम की नींव रखी। साल 2004 में वित्त मंत्रालय के सलाहकार रहे विजय एल केलकर ने कहा कि देश हित में एक कर का सुझाव दिया था।
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2010 में पी चिंदबरम ने घोषणा की थी
इस सुझाव के साथ ही देश में एक टैक्स पर चर्चा शुरू हुई। केंद्र में कांग्रेस की सरकार सरकार के दौरान वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने सभी बजट भाषणों में जीएसटी का संकेत दिया था। उन्होंने 1 अप्रैल 2010 से जीएसटी लागू करने की घोषणा की थी। इस घोषणा को 2014 में आई मोदी सरकार ने इस सपने को पूरा करने का जिम्मा उठाया। वित्तमंत्री अरुण जेटली ने रणनीति बनाई और जीएसटी को लागू कर दिया गया।
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जीएसटी
- फोटो : amar ujala
जीएसटी में टैक्स स्लैब
जीएसटी लगने के बाद कई सेवाओं और वस्तुओं पर लगने वाले अलग अलग टैक्स खत्म हो गए और 'एक देश, एक टैक्स' का नियम लागू हो गया। जीएसटी के तहत 5%, 12%, 18% और 28% के टैक्स स्लैब बनाए गए हैं। इसके अलावा रफ डायमंड (बगैर तराशे हुए डायमंड) के लिए 0.25 फीसदी और गोल्ड पर 3 फीसदी का स्पेशल रेट है, जबकि सिगरेट जैसी चीजों पर अतिरिक्त कर भी लगेगा।
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जीएसटी
- फोटो : amar ujala
कैसे काम करेगा जीएसटी
जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे। पहला सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी (सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स), जो केंद्र सरकार वसूलेगी। दूसरा एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी (स्टेट गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स), जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी। तीसरा आईजीएसटी, यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स), जो दो राज्यों के बीच होने वाले कारोबार पर वसूला जाएगा।
एक जुलाई से खत्म हो गए कर
सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी, ड्यूटीज आफ एक्साइज (औषधीय और टायलेट प्रेपरेशन्स), एडिशनल ड्यूटीज आफ एक्साइज (विशेष महत्व के उत्पाद), एडिशनल ड्यूटीज आफ एक्साइज (टेक्सटाइल एंड टेक्सटाइल प्राडक्ट), एडिशनल ड्यूटीज आफ कस्टम्स (सीवीडी), स्पेशल एडिशनल ड्यूटीज आफ कस्टम्स (एसएडी), सर्विस टैक्स, सेंट्रल सरचार्ज एंड सेस (स्वच्छ भारत सेस, कृषि कल्याण सेस, शिक्षा सेस), वैल्यू एडेड टैक्स (VAT), लग्जरी टैक्स, एंट्री टैक्स (सभी प्रकार के), एंटरटेनमेंट एंड एम्यूजमेंट टैक्स (स्थानीय निकायों द्वारा लागू टैक्स के अलावा), विज्ञापनों पर टैक्स, विक्रय कर, लाटरीज पर टैक्स, राज्य की ओर से लागू सरचार्ज एंड सेस (सामान और सेवाओं की आपूर्ति से संबंधित)