हथियारों के लाइसेंस को लेकर सरकार सख्त हो गई है। वहीं लाइसेंस बनवाने के नियमों में भी बड़े बदलाव किये गये हैं, देखिए कैसे बनेगा अब।
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दरअसल, हरियाणा में खट्टर सरकार ने 2740 शस्त्र लाइसेंस अवैध घोषित कर दिए हैं। इन लाइसेंसधारकों ने केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश के बावजूद 31 मार्च तक गृह विभाग से यूनीक आईडी नहीं लिए। ऐसा न करने वालों की छानबीन सरकार अब तेज करने जा रही है। शस्त्र लाइसेंस धारकों को गृह विभाग नोटिस भेजकर जवाब मांगेगा। जवाब संतोषजनक नहीं होने पर लाइसेंस निरस्त किए जा सकते हैं।
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इसके साथ ही यह भी जानकारी जुटाई जा रही है कि लाइसेंस हासिल करने के लिए अपनाए गए तरीके उचित थे या नहीं। नियत तारीख तक लाइसेंस धारकों ने यूनीक आईडी क्यों नहीं लिए, इससे संबंधित तमाम पहलुओं की छानबीन के बाद इस मामले में अगली कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्रालय के निर्देश पर हरियाणा के सभी शस्त्र धारकों को 31 मार्च तक अपने शस्त्रों की यूनीक आईडी अपडेट करने के आदेश दिए गए थे।
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गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रामनिवास ने बताया कि 31 मार्च तक यूनीक आईडी नंबर नहीं लेने वाले सभी शस्त्र कानूनी तौर पर अवैध हो चुके हैं। यूआईएन को अपडेट क्यों नहीं किया। इनकी छानबीन की जा रही है। उसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए फिलहाल गृह मंत्रालय की ओर से कोई निर्देश नहीं है।
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रामनिवास ने बताया कि जुलाई 2016 से हथियार रखने और लाइसेंस बनवाने के नियम बदल गए थे। इसके तहत बंदूक के साथ अन्य हथियार रखने के लिए लाइसेंस लेना होगा। आर्म्स लाइसेंस को लेकर अब अधिकारी फाइल को नहीं रोक सकेंगे। नए एक्ट में अधिकारियों को तय समय में फाइल पर कार्यवाही करनी होगी। आर्म्स लाइसेंस में फीस भी कई गुणा बढ़ा दी गई है। साथ ही तलवार, भाला, बल्लम रखने के लिए भी लाइसेंस लेना होगा।
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केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचना जारी होने के बाद हरियाणा में आर्म्स एक्ट 2016 को 15 जुलाई से लागू कर दिया है। नए एक्ट के अनुसार अब आपको अपने घर में तलवार रखनी हो तो उसके लिए लाइसेंस लेना होगा। इसके अलावा संगीन, भाला, बल्लम, कटार रखने के लिए भी लाइसेंस लेना पडे़गा, जिसमें लाइसेंस के समय 500 रुपये की फीस अदा करनी होगी। इस लाइसेंस को हर साल रिन्यू कराना होगा।
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इसके लिए 100 रुपये नवीनीकरण फीस देनी पड़ेगी। नए आर्म्स एक्ट के अनुसार 17 तरह की सेवाओं के लिए समय सीमा तय कर दी गई है। अधिकारियों को तय समय में यह काम करना होगा। ऐसा न होने पर अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा। आम्स लाइसेंस के लिए तय सेवाओं में दो दिन से लेकर अधिकतम 60 दिन तक का समय दिया गया है। आर्म्स एक्ट के अनुसार किसी भी काम के लिए दो महीने से ज्यादा का समय नहीं लगेगा।
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नए एक्ट के अनुसार अगर आपको अपने लाइसेंस के साथ यात्रा करनी हो तो उसके लिए 500 रुपये फीस अदा करनी होगी। एक लाइसेंस पर तीन हथियार ले सकते हैं। हर एक हथियार के लिए 500 रुपये फीस देने होगी। लाइसेंस के पते में बदलाव के लिए 500 रुपये फीस देनी होगी। गन के लिए तय 120 रुपये, राइफल के लिए 180 रुपये, रिवॉल्वर के 300 रुपये की फीस को बढ़ाकर एक हजार रुपये कर दिया गया है।
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एनओसी के लिए 500 रुपये फीस तय की गई है। लाइसेंस बुक के लिए 100 रुपये शुल्क देना होगा। लाइसेंस को दूसरे के नाम ट्रांसफर करने के लिए एक हजार रुपये का शुल्क तय किया गया है। लाइसेंस लेने के लिए आवेदन पत्र को शस्त्र अनुभाग में जमा किया जाता है। प्रशासन की ओर से संबंधित तहसील और पुलिस से रिपोर्ट तलब की जाती है। पहले पत्रावली सीओ के पास जाती है और उसके बाद डीसीआरबी।
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यहां से सभी थानों से आवेदक के आपराधिक रिकार्ड के बारे में जानकारी ली जाती है। आवेदक का चरित्र वेरीफिकेशन भी पुलिस व खुफिया विभाग से कराया जाता है। आवेदक को मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है। स्वस्थ होने पर ही यह लाइसेंस दिया जा सकता है। यदि आवेदक का कोई अंग भंग है या फिर दृष्टि दोष है तो लाइसेंस नहीं दिया जा सकता।
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संबंधित तहसील की फाइल पर आवेदक के फार्म पर हल्का लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार और एसडीएम की रिपोर्ट ली जाती है। एसपी और एसडीएम आवेदक की पत्रावली संपूर्ण होने के बाद आवेदक की फाइल को अलग-अलग कर जिलाधिकारी को भेजते हैं। संपूर्ण पत्रावली पूरी होने के बाद जिलाधिकारी अपने विवेकानुसार शस्त्र लाइसेंस जारी कर देते हैं।
आवेदक फीस जमा करने के बाद शस्त्र लाइसेंस खरीदकर उसको अपने जारी किए लाइसेंस पर शस्त्र की इंट्री कराता है। शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण हर तीन साल बाद कराया जाता है। नवीनीकरण के लिए आवेदक को फीस जमा करनी होती है और फिर संबंधित थाना और एसडीएम की रिपोर्ट तलब की जाती है। रिपोर्ट आने के बाद लाइसेंस का नवीनीकरण कराया जाता है।