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सरकारी या प्राइवेट कॉलेज में प्रोफेसर बनना अब आसान नहीं, कई नियम बदले गए हैं

Fri, 23 Jun 2017 09:18 AM IST
संजय कुमार/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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एडमिशन
देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर बनना अब आसान नहीं होगा। कई नियमों में कड़ा बदलाव किया गया है, देखिए।
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medical student - फोटो : demo pic
दरअसल, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए योग्यता निर्धारित कर दी है। इसके तहत अब एमडी और एमएस करने वाले डॉक्टरों को मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में एक साल की सीनियर रेजिडेंट की जॉब करनी होगी। इसके बाद ही वे सहायक प्रोफेसर के लिए आवेदन कर पाएंगे।
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इसका असर अब देश के तकरीबन 15000 एमडी और एमएस डॉक्टरों पर पडे़गा। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि देश में जल्द से जल्द एक्सपर्ट डॉक्टरों की संख्या को बढ़ाया जाए, लेकिन डॉक्टरों की गुणवत्ता में कोई खामी न रहे। इसके लिए एमसीआई ने सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए सीनियर रेजिडेंट का अनुभव होना अनिवार्य कर दिया है।

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एम्स दिल्ली, पीजीआईएमएस चंडीगढ़ और दक्षिण में वैलोर मेडिकल कॉलेज में पहले से ही तीन साल का सीनियर रेजिडेंट अनुभव अनिवार्य है। इसकी मुख्य वजह यहां सीनियर रेजिडेंट की नौकरी करने वालों की भीड़ होना है। यहां छंटनी करने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। अब पीजीआईएमएस रोहतक में यह एक साल का अनुभव अनिवार्य है।
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नए नियमानुसार यदि डॉक्टर अपनी एमडी और एमएस की डिग्री कर चुका है और उसकी आयु 40 वर्ष से अधिक हो गई है तो वह सीनियर रेजिडेंट पद के लिए आवेदन नहीं कर सकता। इसका खामियाजा यह होगा कि वह डॉक्टर किसी संस्थान में सहायक प्रोफेसर की पोस्ट के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। इस नियम का असर कई राज्यों में डॉक्टरों पर पडे़गा।
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इस नियम की सबसे अधिक मार अब निजी मेडिकल और सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पडे़गी जो कि नए सिरे से तैयार हो रहे हैं। भविष्य में अब बगैर योग्यता पूरी किए यदि कोई संस्थान इस पद पर डॉक्टरों की भर्ती करता है तो एमसीआई के नियमानुसार वह मान्य ही नहीं होगा। बात यदि हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस की करें तो यहां एमबीबीएस डॉक्टर को पहले पांच साल नौकरी करने के बाद ही एमडी, एमएस में आरक्षित कोटे के लिए आवेदन करने की मंजूरी मिलती है। ऐसे में इनके लिए सहायक प्रोफेसर की सीट लेना टेढ़ी खीर हो जाएगा।
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ऐसे चलती है प्रक्रिया
एमबीबीएस में प्रवेश के दौरान सामान्य आयु---17, एमडी और एमएस कोर्स पूरा करने के दौरान----28, एक साल की एसआरशिप-----29, डीएम और एमसीएच के दौरान------33। नोट : दी गई आयु का औसत उन डॉक्टरों का है जोकि टॉपर हैं। यदि इसमें बीच में कोई व्यवधान आता है तो यह समय लंबा चला जाता है।

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सीनियर रेजिडेंट का मुख्य कार्य
एमडी और एमएस करने के बाद डॉक्टर के जिम्मे ओपीडी में मरीजों की जांच करना, ऑपरेशन करना और वार्डों में राउंड कर मरीजों की स्थिति को देखना होता है। ये मरीज का उपचार करने में पूर्ण रूप से एक्सपर्ट होते हैं।
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8 जून 2017 को एमसीआई ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके अनुसार सहायक प्रोफेसर के पद पर केवल वे ही डॉक्टर आवेदन कर पाएंगे जिन्होंने मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में कम से कम एक साल बतौर सीनियर रेजिडेंट काम किया हो। 40 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद यदि कोई डॉक्टर सीनियर रेजिडेंट पद पर काम करता है तो इस अनुभव के आधार पर आवेदन नहीं कर पाएगा।
- डॉ. रोहतास यादव, डीन अकेडमिक अफेयर्स, हेल्थ विवि रोहतक
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