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10 के सिक्के के सभी 14 डिजायन मान्य, कोई लेने से मना करे तो यहां दें शिकायत, जेल हो सकती है

Fri, 07 Feb 2020 01:31 PM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, कुरुक्षेत्र(हरियाणा)
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10 रुपये के सिक्के दिखाता दुकानदार - फोटो : अमर उजाला
देश में 10 रुपये के सिक्के के 14 डिजायन उपलब्ध हैं और वे सभी मान्य हैं। अगर कोई इन्हें लेने से इंकार करता है तो सजा भुगतनी पड़ सकती है, जेल तक हो सकती है।
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10 रुपये के सिक्के - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
दरअसल, दस रुपये के नकली और असली सिक्कों को लेकर लोग आज भी असमंजस में हैं। कई दुकानदार इन सिक्कों को लेने से साफ मना कर देते हैं। ऐसे ही जब दुकानदार यही सिक्का ग्राहक को देता है तो ग्राहक भी इसे लेने से इंकार कर रहा है। हालांकि दस रुपये के सिक्कों पर जनता के बीच भ्रम की स्थिति को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक स्पष्ट कर चुका है कि कोई भी सिक्का अमान्य नहीं है, सभी सिक्के चलन में हैं। ये समय-समय पर जारी किए गए अलग अलग डिजायनों के 14 सिक्के हैं। बावजूद इसके लोग भ्रम से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ग्राहकों का कहना है कि दुकानदार सिक्के लेने से मना करते हैं। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक सिक्कों को नकली बताते हैं।
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10 रुपये के सिक्के - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
10 रुपये के सिक्के के सभी 14 डिजायन वैध: एसडीएम
कुरुक्षेत्र जिले एसडीएम अश्वनी मलिक ने कहा कि दस रुपये के सिक्के के सभी 14 डिजायन वैध हैं। रिजर्व बैंक अनुसार, वह चलन में सिर्फ उन्हीं सिक्कों को लाता है जो सरकारी टकसाल में ढाले जाते हैं। इन सिक्कों में अलग फीचर्स हैं, ताकि ये आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक मूल्यों के विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित कर सकें और इन्हें समय-समय पर पेश किया गया है। फिर भी यदि लोगों को सिक्कों को लेकर कोई भ्रम है तो वह पास के किसी भी बैंक में जाकर उसे चैक करवा सकता है। वहीं बैंक एसबीआई प्रबंधक जसपाल सिंह ने भी कहा कि दस के सभी सिक्के असली हैं और मान्य हैं। जरूरत है तो बस इनके बारे में जानने की और इनकी पहचान करने कि असली कौन सा है व नकली कौन सा है।

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10 रुपये के सिक्के - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
आरबीआई के निर्देशानुसार, 10 रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा है। इसको लेने से इनकार करने पर राजद्रोह का मामला बनता है और जो ऐसा करता है उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124 (1) के तहत मामला दर्ज हो सकता है क्योंकि मुद्रा पर भारत सरकार वचन देती है। शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। जेल तक हो सकती है। आरबीआई के निर्देशानुसार,  रिजर्व बैंक ने दस रुपये का सिक्का चलन से बाहर नहीं किया है। ऐसे में असली सिक्का लेने से मना करना कानूनन गलत है और भारतीय मुद्रा का अपमान है। सिक्कों को लेने से मना करने पर भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत अपराध है। इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक दंड, कारावास अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है।
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10 रुपये का सिक्का
आरबीआई ने 10 का नया सिक्का 26 मार्च 2009 को जारी किया था, जो मान्य है। इसके अलावा ऐसे 14 तरह के सिक्के हैं, जो वैध हैं। जैसे- श्रीमद राजचंद्र के 150वें जन्मदिवस पर जारी, नेशनल आर्काइव के 125वें वर्ष के अवसर पर जारी, स्वामी चिन्मयानंद की जन्म शती के अवसर पर जारी, डॉ. बीआर अंबेडकर की 125वीं वर्षगांठ पर जारी, इंटरनेशनल योगा डे पर जारी, महात्मा गांधी के दक्षिण अफ्रीका से लौटने के सौ वर्ष पूरा होने पर जारी, क्वॉयर बोर्ड की डायमंड जुबली पर जारी, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड की सिल्वर जुबली पर जारी, भारतीय संसद के 60 वर्ष पूरा होने के अवसर पर जारी, सामान्य सिक्कों की नई श्रृंखला जारी, रिजर्व बैंक के 75 वर्ष पूरा होने के अवसर पर जारी, होमी भाभा के जन्मशती वर्ष पर जारी, ‘विविधता में एकता’ शीर्षक के साथ दो धातुओं के मिश्रण वाला सिक्का, ‘कनेक्टिविटी एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी’ शीर्षक के साथ दो धातुओं के मिश्रण वाला सिक्का
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10 रुपये का सिक्का
असली और नकली में अंतर
असली दस रुपए का सिक्का डबल डाई से तैयार किया जाता है। नकली सिक्के में भी डबल डाई का प्रयोग किया गया है, लेकिन ध्यान से देखने पर इन्हें पहचाना जा सकता है। असली सिक्कों में पीले भाग का रंग हलका हैं, जबकि नकली में पीला भाग ब्राइट है। असली सिक्के में 10 का अंक दो धातुओं के बीच में है और 10 पट्टी बनी हैं। नकली में 10 का अंक सिल्वर धातु के बीच में है और 15 पट्टी हैं। असली सिक्के में भारत और इंडिया अलग-अलग लिखा है। नकली सिक्के में भारत और इंडिया एक साथ है। असली सिक्का शार्प है, जबकि नकली सिक्का थोड़ा खुरदरा है और साइज में भी फर्क है। नकली सिक्के छोटे हैं और इनका वजन भी कम है। नकली सिक्के का पीला भाग जोर देने पर निकल सकता है, जबकि असली में ऐसा नहीं है। अगर आपको नकली सिक्का दिखे तो उसका वीडियो या ऑडियो बना कर इलाके के डीएम ऑफिस या थाने में बताएं।
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