फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सेना में शामिल होना है तो देखिए, बदल गए हैं भर्ती के नियम

Mon, 21 Nov 2016 01:48 AM IST
अमित विश्वकर्मा/अमर उजाला, रेवाड़ी
विज्ञापन
1 of 7
सेना में भर्ती को रैली - फोटो : फाइल फोटो
भारतीय सेना में भर्ती के नियम बदल गए हैं, 13 कुमायूं रेजिमेंट के मेजर जनरल ने इस का खुलासा किया है।
विज्ञापन

2 of 7
13 कुमायूं रेजिमेंट के मेजर जनरल अजय आहरी - फोटो : अमर उजाला
13 कुमायूं रेजिमेंट के मेजर जनरल अजय आहरी (एसएम एडीजी इनफैंट्री) ने कहा कि अब शारीरिक परीक्षा से पहले कंप्यूटर पर लिखित परीक्षा देनी होगी। इसका परिणाम भी थोड़ी देर बाद आ जाएगा।
विज्ञापन

3 of 7
सेना भर्ती - फोटो : bureau
शुक्रवार को देश के सर्वाधिक सैनिक देने वाले अहीरवाल के रेवाड़ी जिले में रेजांगला शौर्य सम्मान समारोह में आए मेजर जनरल ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहा कि अब सेना भर्ती में भी तकनीक को बढ़ाया जाएगा। 

4 of 7
सेना भर्ती
थल सेना की भर्ती में पहले दौड़ करवाते थे। अब पहले कंप्यूटर लिखित परीक्षा कराने का मसौदा तैयार हो चुका है। लिखित परीक्षा में पास अभ्यर्थियों को दौड़ और बाद में मेडिकल होगा। शीघ्र ही इसकी घोषणा कर दी जाएगी। 
विज्ञापन

5 of 7
सेना भर्ती - फोटो : अमर उजाला
मेजर जनरल ने कहा कि यह भी विचार चल रहा है कि पढ़ाई-लिखाई के अनुसार ही सेना में तनख्वाह मिले, जो जितना अधिक पढ़ा-लिखा होगा उसे उतनी ही अधिक तनख्वाह दी जाएगी। मेजर जनरल आहरी ने कहा कि सैनिकों में कला तराशनी जरूरी है। स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री के तहत प्रत्येक सैनिक को सर्टिफिकेट कोर्स जरूरी कराया जाएगा। इससे नौकरी के बाद सैनिक को रोजगार पाने में दिक्कत नहीं होगी। 
विज्ञापन

6 of 7
Indian Army - फोटो : Amar Ujala
मेजर जनरल ने कहा कि 13 कुमायूं रेजिमेंट के 114 जवान 1662 के युद्ध में चीन को अपना वीरता का लोहा मनवा चुके हैं। उस समय भारत-चीनी भाई-भाई का नारा देकर हमारे साथ धोखा हुआ था। हमें संकल्प लेना है कि अब धोखे में नहीं आएंगे। हमारे 114 जवानों ने शहादत देकर चीन के आधुनिक हथियारों से लैस 2000 सैनिकों को मार गिराया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
13 कुमायूं रेजिमेंट के मेजर जनरल अजय आहरी
देश की जनता सुरक्षा का भार सेना के कंधों पर छोड़ चैन से रहे। बॉर्डर पर हमेशा हालात ऐसे ही रहते हैं। पहले भी ऐसी ही स्थिति थी लेकिन अब सूचना तंत्र मजबूत होने के कारण बॉर्डर की हर गतिविधि लोगों तक पहुंच जाती है। उन्होंने 1662 के युद्ध को शायराना अंदाज में बयां करते हुए कहा कि ‘थी खून से लथपथ काया फिर बंदूक उठाकर एक-एक ने मारा’।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें