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प्रेग्नेंसी से बचने के लिए खतरनाक चीजे इस्तेमाल थीं महिलाएं, ये थे तरीके

Wed, 02 Nov 2016 12:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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बर्थ-कंट्रोल के लिए आजकल की महिलाएं दवाइयों का सहारा लेती हैं। लेकिन कभी सोचा है कि पुराने जमाने में महिलाएं बच्चा पैदा होने से रोकने के लिए क्या करती थीं। ये जानकर आप चौंक जाएंगे कि महिलाओं को बर्थ कंट्रोल करने के लिए कैसे कैसे पैंतरों का इस्तेमाल करना पड़ता था।
 
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गर्भ को रोकने के लिए सबसे पहले मगरमच्छ के मल का इस्तेमाल किया जाता था। 1850 BC के मिस्र के कई दस्तावेज बताते हैं महिला योनि में शुक्राणुओं का प्रवेश रोकने के लिए योनि को मगरमच्छ के मल, हनी और सोडियम बाइकारबोनेट के कड़े घोल से भर दिया जाता था। 
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मध्यकाल में महिलाओं की जांघों पर वीजल नाम के जानवर का अंडाशय और एक हड्डी बांध दी जाती थी जिससे महिला गर्भवती नहीं होती थी।

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द अरबन ट्विस्ट.कॉम के अनुसार जियस और इरोपा नाम के ग्रीक देवी-देवता के बेटे क्रेट के राजा मिनौस ने संभोग के दौरान कंडोम का इस्तेमाल किया था। इसे सबसे पहला कंडोम का इस्तेमाल माना जाता है। प्रचलित कहानियों के मुताबिक उनके शुक्राणुओं में सांप और बिच्छू थे। अपने पार्टनर को इन जीवों से होने वाली किसी भी तरह की हानि को रोकने के लिए वो बकरी के मूत्राशय से बने कंडोम का इस्तेमाल करते थे।
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गर्भधारण रोकने के लिए सबसे खतरनाक उपायों में शामिल है लेड और मरकरी से बना घोल जिसे महिलाओं को ‌पिलाया जाता था। इस घोल को चीन में इस्तेमाल किया गया। इस घोल में गर्भाशय क्या, किडनी से लेकर दिमाग तक खराब कर देने और जान ले लेने की शक्ति होती है।
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कनाडा में सोलहवीं शताब्दी में बीवर नाम के जानवर के अंडाशय को शराब में डुबोकर खिलाया जाता था। माना जाता था इससे भ्रूण को मारा जा सकता है। 
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दूसरी शताब्दी में ग्रीस में औरतों को उस पानी को पीने के लिए बोला जाता था जिसमें लोहार अपने औजार ठंडे करते थे। 

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सुमात्रा में पुराने समय में औरतें अफीम के पौधे का प्रयोग संभोग के दौरान करती थीं। उनके मुताबिक इससे गर्भधारण रोका जा सकता था।

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पुराने जमाने में गर्भधारण रोकने के लिए नींबू का इस्तेमाल किया जाता था। नींबी में पाया जाने वाला सिटरस एसिड स्पर्म को खत्म कर सकता है। लेकिन इससे वैज्ञाइना के टिशू भी खत्म हो सकते हैं। 
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द अरबन ट्विस्ट.कॉम के अनुसार कोक पीने से शुक्राणुओं मर जाते थे। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि, सन् 1950 से 1960 के बीच हार्वड मेडिकल स्कूल ने बर्थ कंट्रोल लैब में कई तरह के एक्सपेरिमेंट किए।

एंडरसन, हिल और अंपीयर नाम के वैज्ञानिकों ने चार तरह की कोक को शुक्राणुओं के साथ मिलाया। उन्होंने देखा कि डायट कोक ने सभी शुक्राणुओं को एक मिनट के भीतर मार दिया। वहीं बाकी 41 प्रतिशत दूसरी तरह की कोक में तैरते ही रहे। एंडरसन ने बताया कि कोक में कारबोनिक एसिड ने शुक्राणुओं को मारा। 

 
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