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Water on Moon: चांद पर मिला पानी का खजाना, कॉलोनी बनाने में मिलेगी मदद, इसरो ने किया बड़ा खुलासा

Thu, 02 May 2024 06:39 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
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चांद पर मिला पानी का खजाना - फोटो : Istock
Water on Moon: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बड़ा खुलासा किया है। इसरो के मुताबिक, चंद्रमा पर सतह के नीचे उम्मीद से अधिक बर्फ मौजूद है। बर्फ को खोदकर निकाला जा सकता है। चांद पर कॉलोनी बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इस अध्ययन को इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर, आईआईटी कानपुर, आईआईटी-आईएसएम धनबाद, यूनिवर्सिटी ऑफ साउदर्न कैलिफोर्निया और जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया है। नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है।

अध्ययन के मुताबिक, चंद्रमा के सतह से करीब दो-चार मीटर नीचे इतनी अधिक बर्फ है, जिसकी उम्मीद नहीं की गई थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, चंद्रमा पर पहले की गणना से पांच से आठ गुना अधिक बर्फ है। सबसे खास बात यह है कि चंद्रमा के दोनों ध्रुवों पर यह बर्फ मौजदू है। इसलिए जमीन की खुदाई कर बर्फ को निकाला जा सकता है। इससे चंद्रमा पर इंसान लंबे समय तक रह सकता है। साथ ही दुनिया की कई अंतरिक्ष एजेंसियों को फायदा मिलेगा।
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चांद पर मिला पानी का खजाना - फोटो : Isro
इसरो ने बताया कि उत्तरी ध्रुव पर दक्षिणी ध्रुव से दो गुना से ज्यादा बर्फ है। चंद्रमा पर बर्फ कहां से आई? इस सवाल का जवाब देते हुए इसरो ने कहा कि यह इंब्रियन काल का मामला है। उस दौरान चंद्रमा का निर्माण हो रहा था।
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चांद पर मिला पानी का खजाना - फोटो : Istock
ज्वालामुखीय गतिविधियों से निकलने वाली गैस लाखों सालों में धीरे-धीरे चंद्रमा के सतह के नीचे बर्फ के रूप में जमा हो गई। अमेरिकी लूनर रीकॉन्सेंस ऑर्बिटर और चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से मिले डेटा का विश्लेषण किया गया है।

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चांद पर मिला पानी का खजाना - फोटो : Istock
चंद्रमा पर बर्फीले पानी की उत्पत्ति, फैलाव और विभाजन को समझने के लिए अमेरिकी लूनर रीकॉन्सेंस ऑर्बिटर के रडार लेजर, ऑप्टिकल, न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर, अल्ट्रा-वॉयलेट स्पेक्ट्रोमीटर और थर्मल रेडियोमीटर से यह डेटा लिए गए। 

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चांद पर मिला पानी का खजाना - फोटो : Istock
नए अध्ययन से पुराने अध्ययन को मजबूती मिलती है। इसके पहले किए गए अध्ययन में इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर ने चंद्रयान-2 के ड्यूल फ्रिक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर राडार और पोलैरीमेट्रिक राडार डेटा का उपयोग किया गया था। इस दौरान ही च्रदमा के ध्रुवीय गड्ढों में बर्फ के बारे में पता चला था। अब नए अध्ययन से दुनियाभर की अंतरिक्ष एजेंसियों को अपने भविष्य के चंद्र मिशन को मदद मिलेगी। 
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