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30 साल से लेता है सांप का जहर फिर भी है जिंदा, जानें क्या है राज

Wed, 22 Mar 2017 02:23 PM IST
बीबीसी
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'मैंने पूरी जिंदगी सांपों के बारे में पढ़ाई की है। जब मैं छह साल का था तब मैंने सांप पाला था।' स्टीव लुडविन बीबीसी से बातचीत में बताते हैं, 'मैं बचपन में मियामी गया था जहां मैने बिल हास्ट को देखा, वो सांप का जहर अपने शरीर में इंजेक्ट किया करते थे। हास्ट मानते थे कि जहर से शरीर को फायदा होता है। मुझे ये विचार पसंद आया। 17 साल की उम्र में मैंने भी वही किया।
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स्टीव के पास कई सांप हैं जिनसे वे जहर निकालते हैं। वे कहते हैं कि ये दर्दनाक प्रक्रिया है और सांप को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। जिस जहर को उन्होंने बीबीसी के सामने खून में इंजेक्ट किया वो हेमोटॉक्सिन है जो रेड ब्लड सेल को नष्ट कर देते हैं और अंगो को काफी नुकसान पहुंचा सकते हैं। स्टीव पहले जहर को त्वचा पर रखते हैं और फिर सुई के जरिए शरीर में डालते हैं। एक टीवी शो में शामिल रहे डॉक्टर गेब्रिइल वेस्टन के मुताबिक स्टीव खुशकिस्मत हैं कि वो जिंदा हैं।
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डॉक्टर गेब्रिइल वेस्टन अपने खून का नमूना लेकर बताते हैं कि जब खून में हिमोटॉक्सिन मिलता है तो क्या होता है। वे बताते हैं, 'कुछ ही सैकेंड में खून एक तरह के जैल या थक्कों में बदल जाता है। अगर ये खून आपकी धमनियों में हो तो ये बहना बंद कर देगा और आप मर जाएंगे।' डॉक्टर गेब्रिइल वेस्टन बताते हैं, 'जैसे दवाइयां हमारे शरीर पर काम करती हैं ये कुछ वैसा ही है।

दवाइयां हमारे शरीर में कम स्तर पर टॉक्सिन जमा करती हैं। ये मात्रा इतनी ज्यादा नहीं होती कि शरीर को नुकसान पहुंचाए ताकि हमारा शरीर एंटीबॉडी के जरिए इनसे लड़ना सीख ले। एंटीबॉडी टॉक्सिन या वायरस से लड़ती हैं।'

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स्टीव ने शुरू में जहर का छोटा डोज लेना शुरू किया था। उसके शरीर ने अलग अलग तरह के जहरों को पहचानना सीख लिया और इसके जवाब में अलग-अलग एंडीबॉडी बनाने लगा। वैसे लोगों को सांप के जहर से बचाने के लिए दवाई बनाने पर शोध चल रहा है। सांप के काटने पर एंटीवेनम नाम की एक तरह की दवाई उपलब्ध है लेकिन दुनिया भर में इसकी बहुत किल्लत है। डॉक्टर वेस्टन कहते हैं कि ये दवा घोड़े के खून से लिए गए एंटीबॉडी से बनती है इसलिए मनुष्यों में इस्तेमाल के अपने खतरे हैं।
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इसलिए वैज्ञानिक मनुष्यों के खून से बनी एंटीबॉडी बनाने चाहते हैं जिसमें स्टीव का खून काम आ रहा है। स्टीव कहते हैं, 'अब मैं खुशी खुशी मर सकता हूं कि मैंने कुछ सकारात्मक किया।'
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