महारानी जिन्द कौर और उनके पुत्र
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मां और बेटे ने बहुत कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया, लेकिन उनका संबंध अटूट रहा। जिन्द कौर और दिलीप सिंह की मुलाकात 1861 में हुई और इसके बाद जिन्द कौर ने दो साल अपने बेटे के साथ ब्रिटेन में बिताए। अमेरिका के कॉल्बी कॉलेज प्रोफ़ेसर निकी गुनिंदर कौर सिंह का कहना है,"महाराजा दिलीप सिंह और महारानी जिन्दां के बीच महीनों तक चले और महाद्वीप के पार तक हुए पत्राचार वास्तव में अमूल्य संपत्ति हैं।"
उनका कहना है कि बेटे के पत्र ने मां के जीवन को सुख से परिपूर्ण कर दिया था। निकी गुनिंदर सिंह कौर के मुताबिक 19वीं सदी में हुए ये पत्राचार जीवन में खुशी भर देते हैं और जब हम 14 मई, 2017 को मदर डे मना रहे हैं तो ये हमारे रिश्तों भी नया आयाम भरेंगे। इस मौके पर पंजाबी भाषा की यह कहावत बिल्कुल सटीक बैठती है, 'मां दी सूरत, रब दी मूरत।'