समुद्र मंथन
कहते हैं कि सागर मंथन से जब अमृत कलश प्राप्त हुआ, तब अमृत घट को लेकर देवताओं और असुरों में खींचातानी शुरू हो गई। ऐसे में अमृत कलश से छलक कर अमृत की बूंद जहां पर गिरी, वहां पर कुंभ का आयोजन किया गया। अमृत की खींचातानी के समय चंद्रमा ने अमृत को बहने से बचाया। गुरू ने कलश को छुपा कर रखा। सूर्य देव ने कलश को फूटने से बचाया और शनि देव ने इंद्र के कोप से रक्षा की। इसलिए जब इन ग्रहों का संयोग एक राशि में होता है, तब कुंभ का आयोजन होता है। क्योंकि इन चार ग्रहों के सहयोग से ही अमृत की रक्षा हुई थी।