प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दिल्ली जेल में लंबे समय तक लॉ अफसर रहे सुनील गुप्ता ने पिछले दिनों मीडिया को बताया था, "आखिरी इच्छा वाली कोई बात नहीं होती है। मान लीजिए, अपराधी आखिरी इच्छा के तौर पर कह दे कि उसे फांसी नहीं दी जाए, तो उसकी बात नहीं मानी जा सकती या कोई भी ऐसी चीज मांग ले, जो आप नहीं दे सकते। यह भ्रम है, जेल मैनुअल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है?"