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42 बच्चों को मारने वाली वो सीरियल किलर बहनें, जिनकी फांसी का है अब इंतजार

Fri, 19 Feb 2021 10:48 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
प्रेमी के साथ मिलकर परिवार के सात सदस्यों को कुल्हाड़ी से काटकर मार देने वाली अमरोहा की शबनम को फांसी होने जा रही है। फरवरी के आखिरी या फिर मार्च के शुरुआत में ही उसे फांसी दे दी जाएगी। आजाद भारत में ऐसा पहली बार होगा, जब किसी महिला को फांसी की सजा दी जाएगी। हालांकि, देश में इस समय तीन और महिलाएं हैं, जिनकी फांसी का इंतजार है। इसमें एक विधायक की बेटी और दो सीरियल किलर बहनें हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
हरियाणा की रहने वाली सोनिया ने पिता समेत 8 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी। बता दें कि सोनिया के पिता रेलूराम हिसार के विधायक थे। प्रॉपर्टी की लालच में सोनिया और उसके पति संजीव ने मिलकर 23 अगस्त 2001 को रेलूराम समेत परिवार के आठ लोगों की हत्या कर दी थी। 2004 में सेशन कोर्ट ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई, जिसे हाई कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया था। हालांकि, 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने वापस सेशन कोर्ट की सजा बरकरार रखने का फैसला किया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
समीक्षा याचिका खारिज होने के बाद सोनिया और संजीव ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भी लगाई, जिसे राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर दिया। इतना ही नहीं इन्होंने जेल से कई बार भागने की कोशिश भी कर चुके हैं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
42 बच्चों की हत्या करने वाली दो बहनें
पुणे की रेणुका और सीमा दो बहनें हैं, जो 25 सालों से यरवदा जेल में बंद हैं। ये वही जेल है, जहां कसाब को फांसी दी गई थी। बच्चों का अपहरण और उसकी क्रूर हत्या के मामले में रेणुका और सीमा के साथ उसकी मां अंजनीबाई गावित की अहम भूमिका थी। अंजनीबाई गावित की मौत जेल में ही एक बीमारी से हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों महिलाएं 42 बच्चों की कातिल हैं। हालांकि, कोर्ट में 42 में से अपराध के 9 मामले ही साबित हो पाए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बता दें कि 90 के दशक में दोनो बहनों ने मां के साथ मिलकर चोरी के जरिए हत्या की दुनिया में कदम रखा। जब रेणुका की उम्र 17 साल और सीमा की उम्र 15 साल थी, तो इन्होंने अपनी मां के साथ मिलकर पहले बच्चे की हत्या की थी। अंजनीबाई गावित और उसकी दोनों लड़कियां बच्चों का अपहरण कर, उनसे चोरी करवाती थीं। जब बच्चा काम का नहीं रहता तो उसे मार देतीं थी। बच्चों को मारने के लिए उन्होंने ऐसे-ऐसे तरीके अपनाएं कि सुनकर ही दिल दहल जाएगा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
साल 2001 में सेशन कोर्ट ने दोनों बहनों को मौत की सजा सुनाई। हाईकोर्ट ने भी इस केस की अपील में ‘मौत की सजा' को बरकरार रखा। सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया कि ऐसी औरतों के लिए ‘मौत की सजा' से कम कुछ भी नहीं है।
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