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जानिए असम की चाय से जुड़ी रोचक बातें, चुनावी सरगर्मी से गर्म हो रहा राज्य का माहौल

Sun, 28 Feb 2021 10:15 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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असम के टी गार्डेन का खूबसूरत नजारा - फोटो : Facebook/Assam Our Motherland
भारत के उत्तरपूर्व में स्थित असम चाय का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य माना जाता है। इस वजह से ये राज्य Tea City of India भी कहलाता है। वहीं असम में इस साल विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं और ऐसे में यहां कि चाय पर कई चर्चाएं होंगी। आज हम आपको इस लेख के माध्यम से असम की चाय और इस राज्य से जुड़ी कई रोचक बातें बताएंगे।
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असम के चाय बागान - फोटो : सोशल मीडिया
असम एक ऐसा राज्य है, जहां लगभग 1/5 लोग चाय के क्षेत्र में काम करते हैं। आपको बता दें कि चीन के बाद असम ही दुनियाभर में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण चाय उत्पादक है। यहां की चाय कई देशों में निर्यात की जाती है। रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान समेत कई देशों में असम की चाय की अच्छी डिमांड है।
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असम में चाय बागान (टी इस्टेट) - फोटो : सोशल मीडिया
असम एक ऐसा राज्य है, जहां लगभग 1/5 लोग चाय के क्षेत्र में काम करते हैं। आपको बता दें कि चीन के बाद असम ही दुनियाभर में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण चाय उत्पादक है। यहां की चाय कई देशों में निर्यात की जाती है। रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ईरान समेत कई देशों में असम की चाय की अच्छी डिमांड है।

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असम के टी गार्डेन का खूबसूरत नजारा - फोटो : सोशल मीडिया
आंकड़ों के मुताबिक, असम में हर साल 500 मिलियन किलोग्राम से अधिक चाय का उत्पादन होता है। यहां की चाय में सुबह की चाय में इस्तेमाल होने वाला विशेष इंग्रेडिएंट पाया जाता है। साल 1930 में सर विलियम मैककेचर ने सीटीसी तरीके (cut, tear, curl) का आविष्कार किया था। सीटीसी चाय की प्रोसेसिंग का एक तरीका है, जिसमें चाय की पत्तियां रोलर्स से गुजरती हैं। इन रोलर्स में तेज दांत होते हैं, जो पत्तियों को कुचलते हैं, और कर्ल करते हैं। ऐसा होने से वे छोटे, सख्त छर्रों में बदल जाते हैं, जो पैकिंग के लिए ठीक होते हैं।
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असम के टी गार्डेन का खूबसूरत नजारा - फोटो : सोशल मीडिया
असम में चाय के पौधे की खोज की रॉबर्ट ब्रूस ने की थी। इस राज्य की सिंघो जनजाति की ओर से चाय का इस्तेमाल पेय पदार्थ के लिए किया जाता था। ऐसा भी कहा जाता है कि सिंघो जनजाति के प्रमुख बेसा गाम ने ही 1823 में रॉबर्ट ब्रूस को प्लांट दिखाया था।
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असम के चाय बागान - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सूरज बहुत पहले उगता है। ऐसे में असम के चाय बागान के कर्मचारियों के लिए अलग टाइम जोन बनाया गया है, जिसको चाय बागान टाइम कहा जाता है। चाय बागान टाइम भारतीय मानक समय (आइएसटी) से एक घंटा आगे है।
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