तुर्की वैसे तो एक बहुत ही खूबसूरत देश है, जो यूरेशिया में स्थित है। दरअसल, यूरेशिया एक भौगोलिक भूखंड है, जो यूरोप और एशिया महाद्वीप को मिलाकर बना है। इस देश का कुछ भाग यूरोप में और अधिकांश भाग एशिया में पड़ता है। इसीलिए इसे यूरोप और एशिया के बीच का 'पुल' भी कहा जाता है। क्या आप जानते हैं कि तुर्की को 'यूरोप का रोगी' या 'यूरोप का मरीज' भी कहा जाता है? जी हां, इसके पीछे एक बड़ा ही रोचक इतिहास है। तो चलिए पलटते हैं इतिहास के उन पन्नों को, जिससे हमें ये पता चल सके कि आखिर तुर्की को ऐसा अजीबोगरीब नाम क्यों मिला।
तुर्की का इतिहास तो काफी पुराना है। ईसा से पूर्व यूनानियों का बसाव और फिर स्थानांतरण और ईसा के बाद सन् 800-1400 तक तुर्क जाति का प्रादुर्भाव तुर्की के इतिहास की प्रमुख लिखित घटना है। माना जाता है कि 1200 ईसा पूर्व के आसपास होमर के ओडिसी में वर्णित 'ट्रॉय की लड़ाई' भी तुर्की के पश्चिमी तट पर ट्रॉय के वासियों और यूनानी द्वीपों पर बसे साम्राज्यों के बीच हुई थी।