सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : PTI
एसएम देशमुख ने इस पर विस्तार से लिखा कि कैसे आंबेडकर ने इस आंदोलन का समर्थन किया था। वो बताते हैं, "जब किसानों की ये हड़ताल चल रही थी तब किसानों का एक और सम्मेलन हुआ था।आंबेडकर इस सम्मेलन की अध्यक्षता करने को बुलाया गया था। भाई अनंत चित्रे खुद उन्हें बुलाने मुंबई गए थे।"
इस सम्मेलन में खोटशाही खत्म करो, सावकरशाही खत्म करो जैसे नारे लगाए गए थे। इसमें बाबा साहब भीम राव आंबेडकर ने फार्मर्स लेबर पार्टी की स्थापना की घोषणा की। शेतकारी कामगार पार्टी की जड़ें भी चारी में शुरू हुए आंदोलन से निकली थीं। शंकर राव ने इसकी स्थापना की थी।
सावकारों (साहूकार) के खिलाफ भाषण हुए। कोलाबा समाचार जो शुरू से हड़ताल का विरोध कर रहा था, उसने साहूकारों के खिलाफ 'साहूकारों को खत्म करो' शीर्षक से लेख लिखा। लेकिन आंबेडकर के दौरे के बाद इस आंदोलन में और तेजी आ गई। 25 अगस्त 1935 को जिला कलेक्टर ने बटाईदार और जमींदारों के बीच बैठक करवाई, लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही और हड़ताल जारी रही।कुछ सालों के बाद आंबेडकर ने इंडिपेंडेंट पार्टी के 14 विधायकों के समर्थन से मुंबई के विधानसभा में खोटी व्यवस्था के खिलाफ प्रस्ताव रखा। सरकार ने तब सुनी और मोरारजी देसाई को हड़ताल पर बैठे किसानों से मिलने को भेजा।