आप में से कई लोगों ने हॉलीवुड की लोकप्रिय साइंस फिक्शन फिल्में इंटरस्टेलर, पैसेंजर, कैप्टन अमेरिका, एलियन कोवनेंट तो जरूर देखी होगी। इन सब फिल्मों में क्रायोजेनिक चैम्बरों का जिक्र किया गया है, जिसमें क्रू मेंबर जाकर अपनी बॉडी को लंबे समय के लिए फ्रीज कर लेते हैं। सालों बाद जब वह उससे बाहर निकलते हैं तो उनका शरीर ज्यों का त्यों बना रहता है। कैप्टन अमेरिका फिल्म में दिखाया गया है कि 70 साल बर्फ में जमे रहने के बाद उसे दोबारा जिंदा किया जाता है। हाल ही में कुछ दिनों पहले करेंट बायोलॉजी में एक शोध प्रकाशित हुआ, जिसमें इस बात का जिक्र था कि साइबेरिया में 24,000 हजार वर्षों तक बर्फ में जमे रहने के बाद डेलॉइड रोटिफर नामक सूक्ष्म जीव जिंदा हो गया। यह काफी चौकाने वाला शोध था। इन सब को देखते हुए ये प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या इंसानों को भी लंबे वक्त तक क्रायोजेनिक स्लीप में रखने के बाद दोबारा जिंदा किया जा सकता है? क्या भविष्य में कोई उत्तम तकनीक विकसित हो सकती है, जो मरे हुए इंसानों को दोबारा जिंदा कर सके? इसी उम्मीद में अल्कॉर लाइफ एक्सटेंशन फाउंडेशन में 146 मृत लोगों के शरीर को रखा गया है, जिन्हें उम्मीद है कि भविष्य में विज्ञान की मदद से वे दोबारा जिंदा होंगे।
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क्रायोजेनिक चैम्बर में इंसान
- फोटो : Social media
एरिजोना का अल्कॉर लाइफ एक्सटेंशन फाउंडेशन लग्जरी सबर्ब के बाहर फोनिक्स में स्थित है। ये संस्था उन लोगों के मृत शरीर को एक खास तरह के क्रायोजेनिक चैंबर में रखती है, जिन्हें ये उम्मीद है कि भविष्य में विज्ञान उन्नती करेगा और उन्हें दोबारा जिंदा होने का अवसर मिलेगा। इस खास तरह के चैंबर में मानव शरीर को काफी कम तापमान में रखा जाता है।
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क्रायोजेनिक चैम्बर में इंसान
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कम तापमान में रखने के चलते शरीर में कोई बदलाव और क्षय नहीं होता। अल्कॉर लाइफ एक्सटेंशन फाउंडेशन ने अपनी वेबसाइट पर इस प्रविधि का पूरा जिक्र किया है। मृत शरीर को इस खास तरह के क्रायो चैम्बर में रखने की कीमत करीबन 1.5 करोड़ रुपए है। इस कारण अमीर और रसूखदार परिवार से जुड़े लोग ही इसमें अपने मृत शरीर को रखवाते हैं।
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क्रायोजेनिक चैम्बर
- फोटो : Social media
आपको बता दें कि क्रायोनिक एक खास तरह का प्रक्रिया होती है, जिसमें शरीर को काफी न्यूनतम तापमान में रखा जाता है। क्रायोजेनिकली दफन हुआ शरीर थम जाता है। उसके अंदर होने वाली क्षय की क्रिया रुक जाती है। इस कारण शरीर ज्यों का त्यों बना रहता है। उसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं होता।
इस संस्था ने अपने यहां करीबन 146 लोगों के मृत शरीर को क्रायोजेनिकली एक खास तरह के लिक्विड नाइट्रोजन में जमा कर रखा है। इसमें प्रथम विश्वयुद्ध के एक सिपाही का भी शरीर है। दफन हुए सभी लोगों को ये उम्मीद है कि भविष्य में विज्ञान उन्नति कर मृत लोगों को दोबारा जिंदा करने की तरकीब ढूंढ लेगा।