फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar: 49 फिल्म हस्तियों और इतिहासकार समेत तत्कालीन SSP की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, परिवादी से शपथ पत्र तलब

Mon, 22 Apr 2024 09:01 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Bihar: 49 फिल्म हस्तियों और इतिहासकार समेत तत्कालीन SSP की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, परिवादी से शपथ पत्र तलब
Muzaffarpur: Problems may increase for then SSP, 49 film personalities and historian, court seeks affidavit
 
विज्ञापन
1 of 4
फिल्मी हस्तियों और इतिहासकारों के खिलाफ कोर्ट में चल रहा है मामला - फोटो : अमर उजाला
बिहार के मुजफ्फरपुर व्यवहार न्ययालय में 23 जुलाई 2019 को परिवादी सुधीर कुमार ओझा द्वारा फिल्मी हस्ती अर्पणा सेन, अदुर गोपाल कृष्णन, शोभा दुग्गल, सोमित चटर्जी, रेवती, कोंकणा सेन, श्याम बेनेगल, मणि रत्नम, इतिहासकार रामचंद्र गुहा और अन्य 40 फिल्मी कलाकर तथा इतिहासकार के खिलाफ एक मामला दर्ज करवाया था। दरअसल, यह मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिल्मी हस्तियों और इतिहासकारों द्वारा लिखे गए एक संज्ञानात्मक पत्र से जुड़ा हुआ है। माननीय न्यायालय द्वारा दंड प्रकिया की धारा 156 (3) के तहत प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आदेश दिया गया था। न्यायालय के आदेश के तहत सदर थाना कांड संख्या-673/2019 इन सभी अभियुक्तों के खिलाफ नामजद दर्ज किया गया था। अब कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए परिवादी से मामले में शपथ पत्र मांगा है।
विज्ञापन

2 of 4
फिल्मी हस्तियों और इतिहासकारों के खिलाफ कोर्ट में चल रहा है मामला - फोटो : अमर उजाला
परिवादी ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान अनुसंधानकर्ता द्वारा मेरे द्वारा दिए गए साक्षियों का बयान केस डायरी में दर्ज नहीं किया गया। नगर पुलिस उपाधिक्षक के द्वारा सुपरवीजन भी नहीं किया गया। साथ ही वरीय पुलिस अधीक्षक तत्कालीन मनोज कुमार द्वारा बिना जांच किए असत्य कर सुपरविजन निकाल दिया गया और जांचकर्ता द्वारा न्यायालय में समर्पित कर दिया।



परिवादी ने कहा कि उसके खिलाफ मैंने अदालत में विरोध-पत्र दाखिल किया था। उसी को लेकर परिवाद पत्र 322/2021 दर्ज करते हुए जांच में रखा गया है। मेरे द्वारा उपरोक्त अभियुक्तगण के खिलाफ परिवाद पत्र में लगाए गए आरोप से संबंन्धित विरोध पत्र दाखिल किया गया है। उसमें आरोप है कि गवाह महेश साह, संतोष कुमार, कंगना रनौत, मधुकर मंडाकर का कोई बयान पुलिस द्वारा नहीं लिया गया। अन्य गवाहों का भी बयान जांच के दौरान नहीं लिया गया। प्राथमिकी में वशिष्ट नारायण ओझा को गवाह नहीं बनाया गया था, फिर भी पुलिस ने उनका बयान डायरी में दर्ज कर भेजा है।
विज्ञापन

3 of 4
परिवादी सुधीर कुमार ओझा - फोटो : अमर उजाला
परिवादी सुधीर कुमार ओझा ने बताया कि दर्ज परिवाद पत्र में मैंने आरोप लगाया है कि दिनांक 23 जुलाई 2019 को सभी टीवी चैनल और अखबारों में देखने-पढ़ने का मौका मिला, जिसमें नामित अभियुक्तगण के साथ-साथ 49 फिल्मी कलाकारों द्वारा एक पत्र प्रधानमंत्री के नाम लिखा गया था। उसमें आरोप लगाया गया था कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में अब दलित असुरक्षित हैं, मुस्लिम असुरक्षित हैं और खुलेआम मॉब लिंचिंग की जा रही है। उसी पत्र में यह भी जिक्र था कि श्रीराम का नारा लगाते हुए इनके राज्य में लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। परिवादी ने आशंका जताते हुए कहा कि उक्त पत्र को अभियुक्तगण द्वारा प्रचारित-प्रसारित कर देश को खंड-खंड करने, विदेश में बदनाम करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि अपने देश में तथा विदेश में खराब करने का कार्य किया जा रहा है।
विज्ञापन

4 of 4
फिल्मी हस्तियों और इतिहासकारों के खिलाफ कोर्ट में चल रहा है मामला - फोटो : अमर उजाला
उसके बाद इनके खिलाफ 62 फिल्मी कलाकारों ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर अभियुक्तगण द्वारा लिखे गए पत्र में आरोपों का जोरदार विरोध किया है। परिवादी ने कहा कि अभियुक्तगण द्वारा पत्र में इस बात का जिक्र किया गया कि जय श्रीराम का नारा लगाकर मॉब लिंचिंग का कार्य किया जा रहा है, जिसे पढ़ और सुनकर मेरी भावना आहत हुई और धार्मिक भावानओं को ठेस पहुंची। उन्होंने कहा कि इससे देश के करोड़ों हिंदुओं की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का कार्य किया गया। भगवान राम का नाम लेकर बदनाम किया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें