केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा कि पूरे भारत में ऑटोमोबाइल डीलरों को भी वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं खोलनी चाहिए। पीटीआई की रिपोर्ट में इसकी जानकारी मिली है। पांचवें ऑटो रिटेल कॉन्क्लेव में बोलते हुए, गडकरी ने कथित तौर पर कहा कि भारत सरकार एक सर्कुलर अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित कर रही है, और उस रणनीति का पालन करते हुए, सरकार डीलरों को वाहन स्क्रैपिंग सुविधाएं शुरू करने की अनुमति देगी।
पहले से हैं इनके व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर
मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स सहित कुछ ऑटो निर्माताओं ने पहले ही देश भर में अपने व्हीकल स्क्रैपिंग सेंटर (वाहन स्क्रैपिंग केंद्र) शुरू कर दिए हैं। हालांकि, देशभर में वाहन स्क्रैपिंग केंद्रों की संख्या पुराने वाहनों की संख्या की तुलना में बहुत कम है जिन्हें स्क्रैप करने की जरूरत है। ज्यादा वाहन स्क्रैपिंग केंद्र शुरू होने से प्रक्रिया में तेजी आएगी। इसलिए, गडकरी ने कहा है कि ऑटोमोबाइल डीलरों को ऐसी सुविधाएं स्थापित करने के लिए आगे आना चाहिए।
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बढ़ेगी वाहनों की बिक्री
मंत्री जी ने आगे कहा कि वाहन स्क्रैपिंग नीति से ऑटोमोबाइल की बिक्री 18 प्रतिशत बढ़ जाएगी। उनका मानना है कि कबाड़ हुए वाहनों से मिले कच्चे माल का इस्तेमाल करने से कच्चे माल की खरीद पर 33 प्रतिशत लागत की बचत होगी और नए वाहनों की बिक्री में 18-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। साथ ही उनका मानना है कि यह नीति भारत को वैश्विक ऑटोमोबाइल मैन्युफेक्चरिंग केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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कम होगा प्रदूषण
अगस्त 2021 में पहली बार पेश की गई वाहन स्क्रैपेज नीति, वाहन प्रदूषण स्तर को कम करने के लिए पूरे भारत में पुराने और अनफिट वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने पर केंद्रित है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि पुराने वाहन नए मॉडलों की तुलना में पर्यावरण को ज्यादा प्रदूषित करते हैं। इस नीति का मकसद 20 वर्ष से ज्यादा पुरानी निजी कारों और 15 वर्ष से ज्यादा पुराने कमर्शियल व्हीकल्स (वाणिज्यिक वाहनों) का पंजीकरण रद्द करना है।
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Pollution
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कैसा होगा इकोसिस्टम
पुराने और अनफिट वाहनों को स्क्रैप करने और उन्हें भारतीय सड़कों पर मॉडर्न और नए वाहनों से बदलने के सरकार द्वारा वित्त पोषित कार्यक्रम के तहत, प्राथमिक लक्ष्य देश भर में कम कार्बन फुटप्रिंट हासिल करने के लिए अनफिट और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए एक इकोसिस्टम बनाना है।
इस साल अप्रैल में लागू की गई वाहन स्क्रैपेज नीति ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (एटीएस) के जरिए भारी वाणिज्यिक वाहनों (एचसीवी) की फिटनेस टेस्टिंग को अनिवार्य बनाती है। अन्य प्रकार के वाणिज्यिक वाहनों (सीवी) और निजी वाहनों (पीवी) के लिए, फिटनेस परीक्षण जून 2024 से शुरू होकर सिर्फ एटीएस के जरिए आयोजित किया जाएगा। यदि कोई वाहन फिटनेस परीक्षण में नाकाम रहता है, तो इसे ईएलवी (एंड-ऑफ-लाइफ) के रूप में परिभाषित किया जाएगा। जिसके बाद वाहन को स्क्रैप कर दिया जाएगा।