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World Bicycle Day 2021: हीरो साइकिल ने छेड़ा 'साइकिलिंग के हीरो' अभियान, सुना रहा आम लोगों की कहानियां

Thu, 03 Jun 2021 06:50 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Cycling - फोटो : Pixabay
कुछ हीरो सूट नहीं पहनते हैं, वे साइकिल चलाते हैं। अगर आप दो पहिया वाहन चलाने के शौकीन हैं और आप अपनी पसंदीदा साइकिल के साथ सड़क पर जाने के लिए प्रेरणा ढूंढ़ रहें हैं तो अपने आसपास देखें। ये रोजमर्रा के हीरो होते हैं जो अपने प्रेरणादायक सफर से कई लोगों को प्रेरित करते हैं और फिटनेस, खेल, वातावरण के लिए कई लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। विश्व साइकिल दिवस से पहले हीरो साइकिल ने इन 'हीरोज ऑफ साइकिलिंग' को सम्मानित करने के लिए एक पहल चलाई है। यह पहल 'रोड पे दिखेगी, तभी चलेगी' अभियान का हिस्सा है। इस अभियान ने लोगों को साइकिल चलाने की जरूरत को लेकर चर्चा छेड़ी है और शहर में साइकिल के अनुकूल इंफ्रस्ट्रक्चर बनाने की मांग की है।

विश्व साइकिल दिवस 3 जून को मनाया जाता है और इस मौके पर साइकिल का इस्तेमाल करने के फायदों पर ध्यान आकर्षित करता है। साइकिलिंग परिवहन का एक सरल, किफायती, स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ साधन है। #HeroesOfCycling 30 प्रेरणादाई कहानियों को 30 दिनों में सबके सामने पेश कर रहा है और ये सभी कहानियां हीरो साइकिल के सोशल मीडिया के सभी हैंडल पर उपलब्ध हैं। 
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Cycling - फोटो : HeroCycles
महीने भर चलने वाली इस एक्टिविटी ने साइकिल को मुख्यधारा में लाने की आवश्यकता पर एक सकारात्मक संवाद उत्पन्न करने में मदद की है, खासकर ऐसे समय में जब हमारे शहरों में एक विनाशकारी महामारी फैल रही है, जिससे सार्वजनिक परिवहन का उपयोग असुरक्षित हो गया है।

गुड़गांव में एक 13 साल से कम उम्र की लड़की से लेकर बंगलूरू में युवा होमस्कूलर तक, शिमला में एक 21 वर्षीय पेशेवर माउंटेन बाइकर से लेकर 2015 में साइकिल चलाने वाली और एक दिन में 300 किमी तक पैदल चलने वाली महिला तक, भारत के आम लोगों की इन सभी लोगों की प्रेरणादायक कहानियों को मल्टी-प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया पहल के माध्यम से लोगों के साथ शेयर किया जा रहा है। ये सभी हीरो साइकिल को काम करने के लिए या साइकिल को एक पेशे के रूप में, फिट रहने के लिए या सिर्फ मनोरंजन के लिए चलाते हैं। 
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Cycling - फोटो : HeroCycles
11 वर्षीय अविरा भट्ट को साइकिल के प्रति प्रेम उनके मां बाप से मिला। जब वह 10 साल कम उम्र की थी तभी उन्होंने साइकिल कम्युनिटी को उस समय सकते में डाल दिया जब उन्होंने 40 किलोमीटर की यात्रा साइकिल से पूरी की। अविरा का कहना है, "जब मै छोटी थी तभी से मै साइकिल को चलाना पसंद करती थी। साइकिल के बारे में हर चीज मुझे अच्छी लगती है। जैसे-जैसे मै बड़ी हुई वैसे-वैसे मुझे साइकिल चलाने के शारीरिक और मानसिक फायदे के बारे में पता चला। जैसे कि अब साल भर हो चुके हैं, लोग यह जानने के बाद भी मोटर वाहन वातावरण के लिए खतरनाक होते हैं, फिर भी वे इसका इस्तेमाल करते हैं। साइकिल से जिंदगी बदल सकती है। मै आपसे अनुरोध करती हूं कि आप आज से ही साइकिल चलाना शुरू करें।" 

ट्रैफिक जाम के लिए मशहूर महानगर बंगलूरू के निवासी 17 वर्षीय होमस्कूलर निहार ठक्कर सार्वजनिक परिवहन, साइकिल चलाने और पैदल चलने के शौकीन हैं, और वह एक ऐसा ऐप बनाने के लिए काम कर रहे हैं, जो सुरक्षित बुनियादी ढांचा और सामुदायिक जुड़ाव कार्यक्रम के द्वारा साइकिल चलाने के मॉडल को बढ़ावा देता है।

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Cycling - फोटो : HeroCycles
निहार ठक्कर ने कहा, "18 साल से कम उम्र के व्यक्ति के रूप में मैं गाड़ी नहीं चला सकता। मेरी साइकिल मुझे वह आजादी देती है जो मैं चाहता हूं। मैंने पिछले कुछ महीनों में और भी बहुत सी जगहों की खोज साइकिल के जरिए की है। ऐसा लगता है कि मैं अब शहर को बेहतर तरीके से जानता हूं। साइकिल से कोई जहरीला उत्सर्जन नहीं होता है और वे बहुत स्वस्थ होती हैं, मुझे लगता है कि हम सभी को साइकिल चलाने पर फोकस करना चाहिए।" 

माउंटेन बाइकर्स लक्ष्य जांगिड़ (जयपुर) एक प्रो एमटीबी स्टंट राइडर और विश्व चैंपियन और शिमला के अक्षित गौड़, अंडर-19 नेशनल एमटीबी चैंपियन, साइकिलिंग से 'भावनात्मक रूप से जुड़े' हैं। वे साइककिलिंग को 'जीवन का एक तरीका' मानते हैं। उन्होंने लोगों से काम पर या किराने का सामान खरीदने के लिए रोज की आवाजाही के लिए साइकिल चलाने का आग्रह किया है, क्योंकि साइकिल चलाने से व्यक्ति स्वस्थ और खुश रहता है। 
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Cycling - फोटो : Pixabay
(लुधियाना) की रितु मेहता, जिन्होंने 2015 में साइकिल चलाना शुरू किया और 2021 में सिर्फ 9.5 घंटे में 162 किमी की दूरी तय करने के लिए वाघा सीमा और स्वर्ण मंदिर तक साइकिल चलाई। उन्होंने कहा, "साइकिल का शुक्र हो कि मुझे पंजाब के उन हिस्सों का पता लगाने का मौका मिला जहां कोई कार के जरिए नहीं पहुंच सकता है। साइकिलिंग खुशी का स्रोत है। यह मेडिटेशन का एक रूप है जो मुझे जमीन से जोड़े रखता है। यह मेरे जीवन का एक प्रमुख हिस्सा बन गया है और मैं आपको इसे अपने कार्यक्रम का एक अनिवार्य हिस्सा बनाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।"

हीरो साइकिल के सीइओ रोहित गोथी ने कहा, "हमारे मोटर के प्रति जुनून वाले शहरों में रहने वाले कई लोग फिटनेस के लिए, अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए या सिर्फ अपने अनुभव के लिए साइकिल चलाने के लिए तरसते हैं। दुर्भाग्य से सड़कों पर अनुकूल बुनियादी ढांचे और साइकिल चालकों की कमी से साइकिल चलाने के प्रति ऐसे लोगों का उत्साह ठंडा हो जाता है। हमारे अभियान का उद्देश्य साइकिल के अनुकूल शहर बनाने की आवश्यकता पर सरकार का ध्यान केंद्रित करवाना है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

ऐसे समय में जब कोविड-19 ने सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को कई लोगों के लिए असुरक्षित बना दिया है, परिवहन के दैनिक साधन के रूप में साइकिल को बढ़ावा देना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह स्वास्थ्य और फिटनेस के साथ-साथ बाहरी मौज-मस्ती और शारीरिक दूरी बनाए रखने की जरूरत को भी पूरा करती है। हमारा उद्देश्य साइकिल प्रेमियों को यह बताना है कि साइकिल चलाने के लिए प्रेरणा न ढूंढ़े, बल्कि अपने आसपास ही देखें आपको कई सारी प्रेरणादाई कहानियां मिल जाएंगी जो आपको साइकिल चलाने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। इस अभियान का उद्देश्य ऐसे संकोची साइकिल प्रेमियों को उनकी मांगों और चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक मंच प्रदान करना है।"
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Cycling - फोटो : Pixabay
अभियान साइकिल के अनुकूल शहरों में सड़कों के बुनियादी ढांचों को बनाने की मांग करता है। यही नहीं इस अभियान का उद्देश्य और ज्यादा भारतीयों को साइकिल चलाने की ओर आकर्षित करना है। 

गोथी ने कहा, "कोविड-19 से हमारे जीवन में काफी बदलाव आया है और हम इससे एक नए नॉर्मल में ढल चुके हैं। और इस नए नॉर्मल में स्वयं और पर्यावरण की देखभाल समान रूप से करना महत्वपूर्ण हो गया है, और हर दिन बढ़ती संख्या में लोग इस जरूरत को महसूस कर रहे हैं। साइकिल चलाने से हमें संतुलन बनाने में मदद मिलती है, सरकारों और शहरी योजनाकारों को सड़कों पर, नगरपालिका पार्कों के साथ-साथ आवासीय क्षेत्रों में साइकिल के लिए डेडीकेटेड लेन बनाने के लिए काम करना चाहिए। साइकिल के बढ़ते उपयोग से न सिर्फ लोगों को महामारी के दौरान सुरक्षित यात्रा करने में मदद मिलेगी, बल्कि इसके जबरदस्त पर्यावरणीय और स्वास्थ्य लाभ भी होंगे। यह पर्सनल कारों के ज्यादा उपयोग को कम करने में भी मदद करेगा।"  
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Hero Cycle - फोटो : HeroCycles
हीरो मोटर्स कंपनी के बारें में
HMC ग्रुप 1.2 बिलियन डॉलर एसेट बेस वाले एचएमसी ग्रुप का हिस्सा है और दुनिया भर में 10,000 से ज्यादा लोग इस दिग्गज साइकिल कंपनी हीरो साइकिल में काम करते हैं। 1956 में स्थापित हीरो साइकिल्स लिमिटेड आज दुनिया की सबसे बड़ी साइकिल निर्माता कंपनी बन गयी है। कंपनी के पास हर साल 6 मिलियन (60 लाख) साइकिल की मैनुफक्चरिंग क्षमता है, जिसमें सबसे ज्यादा लुधियाना (पंजाब), बिहटा (बिहार), गाजियाबाद (यूपी) के साथ-साथ श्रीलंका में इंटेग्रेटेड प्लांट्स में बनती हैं।

एचएमसी ग्रुप का ब्रिटेन में एक डिजाइन सेंटर है और इसके अलावा कंपनी यूके बेस्ड एवोसेट स्पोर्ट्स, जर्मनी बेस्ड एचएनएफ और भारत में फायरबॉक्स बाइक्स का स्वामित्व रखती है। एवोकेट स्पोर्ट्स हीरो साइकिल्स का पहला विदेशी अधिग्रहण था और इससे हीरो कंपनी यूरोपीय साइकिल बाजार में अपने पैर जमाये, HNF ने हीरो साइकिल्स को हाई-एंड इलेक्ट्रिक साइकिल्स में प्रवेश करने में मदद की। दूसरी ओर फायरफॉक्स बाइक का अधिग्रहण भारत में तेजी से बढ़ते प्रीमियम साइकिल सेगमेंट में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए हीरो कंपनी एक रणनीतिक कदम था। 
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