धीरे-धीरे बदल रही है ग्राहकों की पसंद
माना जा रहा है कि अगले साल तक यूटीलिटी व्हीकल्स की डिमांड बढ़ेगी और ऑटोमोबाइल सेगमेंट में सबसे पॉपुलर हैचबैक कारों को पीछे छोड़ देंगी। ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि ग्राहकों की पसंद धीरे-धीरे बदल रही है। उन्हें ज्यादा जगह के साथ मॉडर्न लुक भी चाहिए, साथ ही इन गाड़ियों का स्पोर्ट्स फील भी उन्हें अपील कर रहा है।
40 फीसदी हिस्सेदारी एसयूवी सेगमेंट की
गाड़ियों की बिक्री के सितंबर के आंकड़ों पर गौर करें, पैसेंजर व्हीकल्स सेगमेंट में अकेले 40 फीसदी हिस्सेदारी यूटिलिटी व्हीकल्स की है। सबसे ज्यादा बिक्री किआ सेल्टोस, ह्यूंदै वेन्यू, एमजी हेक्टर और मारुति सुजुकी एक्सएल6 की रही है। हैचबैक के मुकाबले यूटिलिटी सेगमेंट केवल पांच फीसदी पीछे रहा है। वहीं उम्मीद जताई जा रही है कि इस साल के आखिर तक दोनों सेगमेंट के बीच यह आंकड़ा घट कर दो फीसदी यूटिलिटी व्हीकल्स 38 फीसदी और हैचबैक का 40 फीसदी तक रह जाएगा।
बड़े शहरों में एसयूवी का क्रेज
वहीं 2020 तक यूवी सेगमेंट की हिस्सेदारी हैचबैक सेगमेंट से ऊपर पहुंच जाएगी। वहीं छोटे शहरों और कस्बों में रह रहे भारतीय अभी भी हैचबैक्स और सेडान कारें खरीद रहे हैं, जबकि बड़े शहरों में रहने वाले लोग अपनी कारों को एसयूवी सेगमेंट में अपग्रेड कर रहे हैं। इसकी वजह है कि एसयूवी न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि दिखने में स्टाइलिश और स्पेशियस भी हैं, साथ ही उनमें कई एडवांस टेक्नोलॉजी वाले लेटेस्ट फीचर भी मिलते हैं, जिनके चलते शहरी ग्राहकों में इन कारों की मांग में बढ़ोतरी हो रही है।
36 कारें यूटिलिटी सेगमेंट की
खास बात यह है कि ऑटो कंपनियां भी इस सेगमेंट में दिलचस्पी ले रही हैं। आंकड़े गवाह हैं कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी आने के बाद भी पिछले चार सालों में लॉन्च हुई कारों में सबसे ज्यादा एसयूवी सेगमेंट की थीं। हालांकि इस दौरान कारों की लॉन्चिंग बेहद कम रही है। वहीं आने वाले तीन सालों में कम से कम 36 कारें यूटिलिटी सेगमेंट की होंगी, जबकि हैचबैक कारों की संख्या इसकी एक तिहाई होगी। इन कंपनियों में अपनी छोटी कारों के लिए प्रसिद्ध मारुति सुजुकी, चीन की SAIC की हिस्सेदारी वाली एमजी मोटर और कोरिया की किआ मोटर्स अगले तीन सालों में यूटिलिटी व्हीकल्स लॉन्च करने की योजना बना रही हैं। वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और ह्यूंदै मोटर भी इसी दौरान दो-तीन यूटिलिटी व्हीकल्स लॉन्च करेंगी।
पिछले पांच सालों में बढ़ा ट्रेंड
ग्राहकों की पसंद में जो यह बदलाव आया है यह एक महीने या एक साल में नहीं आया है। बल्कि पिछले पांच सालों में ग्राहकों का रुझान एसयूवी सेगमेंट की तरफ बढ़ा है। पांच साल पहले पैसेंजर व्हीकल बाजार में यूटिलिटी व्हीकल्स की हिस्सेदारी 31 से 32 फीसदी थी। एसयूवी की मांग में बढ़ोतरी के चलते ही कंपनियों को ग्राहकों के टेस्ट के हिसाब से गाड़ियां लॉन्च करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
पांच से सात लाख की कीमत में मिनी एसयूवी
यहां तक कि कंपनिया छोटी कारों में भी एसयूवी का भविष्य देख रही हैं। इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण रेनो क्विड, रेनो ट्राइबर और मारूति एस-प्रेसो है। वहीं पांच से सात लाख की कीमत में और भी कई मिनी एसयूवी लॉन्चिंग के इंतजार में हैं। ह्यूंदै, टाटा मोटर्स, रेनो-निसान बी अपनी मिनी एसयूवी लाने की तैयारी कर रही हैं। कंपनियां को केवल नए प्रदूषण उत्सर्जन मानकों BS-6 के लागू होने का इंतजार है। क्योंकि जैसे ही इनके लागू होने का वक्त नजदीक आएगा, ऑटो सेक्टर में गाड़ियों की बिक्री बढ़ेगी और कंपनियों को कम डिस्काउंट देना पड़ेगा।
बेबी एसयूवी का बाजार
रेनो क्विड और मारुति एस-प्रेसो जैसे छोटी एसयूवी की लॉन्चिंग बताती है कि कंपनियां एंट्री सेगमेंट के ग्राहकों को लुभाना चाहती हैं। हालंकि सेडान और हैचबैक कारें आज भी दुनियाभर में मशहूर हैं, लेकिन भारत में बेबी एसयूवी का बाजार तेजी से पकड़ बना रहा है और जल्द ही भारत इस सेगमेंट में टॉप पर होगा।