देश में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बेकाबू होते ईंधन के दाम के बीच लोग अपने बजट को संभालने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसमें केंद्र सरकारों के साथ ही राज्य सरकारों की भी अहम भूमिका हो चली है। आमतौर पर महंगे इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदना अब आपके पॉकेट में फिट हो सकता है। क्योंकि केंद्र सरकार के बाद अब राज्य सरकारों ने भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) को बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव देना शुरू कर दिया है। पिछले एक महीने के दौरान तीन राज्य सरकारों ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर इंसेंटिव देने का एलान किया है। वहीं, 20 राज्य ऐसे हैं जो अपनी ईवी पॉलिसी को अंतिम रूप देने की तैयारी में हैं। इसका फायदा यह हुआ है कि जिन प्रदेशों ने ईवी पर इंसेंटिव देना शुरू कर दिया है, वहां इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदना काफी सस्ता हो गया है। इन राज्यों में ईवी की कीमतों में 40 फीसदी तक की भारी-भरकम कटौती की गई है।
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Atumobile Atum 1.0 Electric Bike
- फोटो : Atumobile
केंद्र सरकार भी दे रही सब्सिडी
बता दें कि जुलाई की शुरुआत में केंद्र सरकार ने फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स इन इंडिया स्टेज 2 (फेम इंडिया 2, FAME II) योजना में आंशिक संशोधन किया था। जिसके बाद वाहन निर्मता कंपनियों ने अपने इलेक्ट्रिक वाहनों के दाम कम किए हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाने और मैन्युफैक्चरिंग के उद्देश्य से, केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों पर सब्सिडी बढ़ाकर ईवी निर्माताओं पर बोझ कम करने का फैसला किया है। कुछ समय पहले जारी की गई भारी उद्योग विभाग की अधिसूचना के मुताबिक, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर मिलने वाले इंसेंटिव (प्रोत्साहन राशि) को बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति kWh कर दिया गया है। पहले सभी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 10,000 प्रति यूनिट की सब्सिडी थी। यानी नई सब्सिडी दर पहले की सब्सिडी दर से 5,000 रुपये प्रति kWh ज्यादा है। इनमें प्लग इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहन शामिल हैं। इसमें बसें शामिल नहीं हैं।
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TVS iQube Electric Scooter
- फोटो : TVS
20 राज्य जल्द करेंगी ईवी नीति का एलान
ताजा संशोधन के तहत भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए प्रोत्साहन की सीमा को वाहन की लागत के 40 फीसदी तक सीमित किया है। पहले यह सीमा 20 फीसदी थी। सरकार के इस कदम का सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो एक नया इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने वाले हैं।
केंद्र सरकार ने फेम-2 योजना की अवधि दो साल बढ़ाकर 31 मार्च, 2024 कर दी है। पहले यह स्कीम अप्रैल, 2022 में खत्म होने वाली थी। अब राज्य सरकारें भी अपने-अपने स्तर पर लोगों के लिए इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना आसान बना रही हैं। बीते एक महीने में महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान ने ईवी इंसेंटिव पॉलिसी लागू की है। तीन अन्य राज्यों में पहले से यह नीति लागू है। इससे इलेक्ट्रिक दोपहिया के दाम लगभग आधे हो गए हैं। 20 राज्य इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन देने की प्रक्रिया में हैं। उनके यहां भी ऐसी नीति लागू होने के बाद ईवी की मांग बढ़ेगी।
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Okinawa i-Praise+ Electric Scooter
- फोटो : Okinawa
योजना के तहत किसे मिलेगा फायदा
फेम-2 योजना के तहत 10,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी निर्धारित की गई है। जिसमें से, दोपहिया वाहनों को, विशेष रूप से ई-स्कूटर को, सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। हालांकि हर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर को इस योजना का फायदा नहीं मिलेगा। CRISIL (क्रिसिल) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 95 फीसदी इलेक्ट्रिक स्कूटर ऐसे हैं जिन्हें फेम-2 सब्सिडी योजना के तहत खरीदते समय छूट नहीं मिल सकती।
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Revolt RV400
- फोटो : Revolt Motors
इन स्कूटर्स पर FAME-II सब्सिडी
भारत सरकार द्वारा निर्धारित फेम-2 मानकों के अनुसार, सिर्फ हाई-स्पीड वाले इलेक्ट्रिक स्कूटर, जिनमें 250 वाट से ज्यादा पावर का इलेक्ट्रिक मोटर मिलता है और जिनकी टॉप स्पीड 25 किमी प्रति घंटा से ज्यादा है, FAME-II सब्सिडी के लिए पात्र हैं। सरकारी घोषणा के अनुसार फेम-2 के तहत सब्सिडी हासिल करने के लिए, किसी इलेक्ट्रिक स्कूटर को एक बार चार्ज करने पर उसे कम से कम 80 किमी की दूरी तय करनी होगी और कम से कम 40 किमी प्रति घंटे की टॉप स्पीड होनी चाहिए।
5 वर्षों में 50 लाख से ज्यादा ईवी की बिक्री
सरकार द्वारा ईवी को बढ़ावा दिए जाने से ईवी कंपनियां उत्साहित हैं। उनका कहना है कि इससे ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहन इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित होंगे। रिवोल्ट मोटर्स ब्रांड की इलेक्ट्रिक मोटरबाइक बनाने वाली कंपनी रतन इंडिया एंटरप्राइजेस की चेयरमैन अंजलि रतन ने कहा, अगले पांच वर्षों में देश की सड़कों पर 50 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक दोपहिया दौड़ने की उम्मीद है। राज्य सरकारों की तरफ से दिए जा रहे प्रोत्साहन की बदौलत यह लक्ष्य पहले भी हासिल हो सकता है।