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Shani Grah: मेष से मीन लग्न तक की कुंडली में कैसा फल देते है शनि, किसके लिए होते हैं अकारक

Mon, 05 Jul 2021 03:57 PM IST
रुस्तम राणा आनंद पाराशर, नई दिल्ली
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शनि मेष से लेकर मीन लग्न तक की कुंडली में अलग अलग भाव के स्वामी होकर विभिन्न फल प्रदान करते है। - फोटो : सोशल मीडिया
ज्योतिष में शनि को दशम और लाभ स्थान का स्वामित्व प्राप्त है। मनुष्य के जीवन में कर्म और उसके लाभ की स्थिति शनि से ही देखी जाती है। इसके अलावा ये ग्रह गूढ़ विद्या और रहस्य का भी कारक है। शनि को आठवें भाव का कारकत्व भी प्राप्त है। इसे नौ ग्रहों के मंत्रिमंडल में नौकर का दर्जा प्राप्त है। इसलिए शनि प्रधान व्यक्ति को कर्म बहुत करना पड़ता है। यह मजदूर और शोषित वर्ग का भी कारक है और न्यायपालिका पर भी इसका अधिकार है। शनि मनुष्य के कर्मों का फल उसे प्रदान करते है और जातक को न्याय देते है। यह एक पाप ग्रह है और इसकी दृष्टि जिस भी भाव पर जाती है उस भाव संबंधी फलों में कमी करती है ऐसा विद्वानों का कथन है। शनि मेष से लेकर मीन लग्न तक की कुंडली में अलग अलग भाव के स्वामी होकर विभिन्न फल प्रदान करते है। आज इस लेख में हम समझते है कि शनि का 12 लग्नों में जातक को क्या फल मिलेगा। 

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मेष लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि परम राजयोग कारक होता है। शनि दशम और लाभ के स्वामी होने के कारण जातक को अथाह लाभ प्रदान करते है लेकिन इसके लिए शनि की स्थिति शुभ होनी चाहिए। इस कुंडली में अगर गुरु शनि की युति केंद्र या त्रिकोण में हो तो जातक ज्ञानी और गुणी दोनों होता है। 
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वृष लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि योगकारक होते है। भाग्येश और दशमेश होने के कारक शनि के शुभ फल जातक को प्राप्त होते है। शनि की शुभ स्थिति जातक को न्यायप्रिय, धर्मात्मा और साधु संतों का प्रिय बनाती है।

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मिथुन लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि कुछ अकारक होते है। इसका कारण उनकी मकर राशि का आठवें भाव में स्थित होना है। लेकिन कुम्भ राशि के भाग्य में होने के कारण जातक को शनि की शुभ स्थिति न सिर्फ दीर्घायु करती है बल्कि वो शोध करने वाला होता है। इस लग्न में अगर बुध और शनि की युति भाग्य या दशम स्थान में हो जाए तो जातक महान गणितज्ञ बनता है।
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कर्क लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि प्रबल अकारक हो जाता है। शनि इस कुंडली में प्रबल मारकेश का फल करता है। अगर कुंडली के आठवें भाव में शुभ ग्रह पीड़ित हो और चन्द्रमा शनि से दृष्ट हो तो जातक अल्पायु हो सकता है।
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सिंह लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि अकारक होता है। यह लग्नेश सूर्य का प्रबल शत्रु है और छठे भाव का फल अधिक करता है। शनि अच्छा नहीं हो तो जातक जीवन भर रोग. कर्ज में डूबा रहता है। कुंभ राशि मारक स्थान में होने के कारण सहयोगी अच्छे नहीं मिलते वही गुरु शुक्र कमजोर हो तो विवाह में देरी हो।
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कन्या लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि सामान्य फल करता है। कन्या लग्न को लेकर फलित का एक सर्वमान्य नियम है की अगर कन्या लग्न की कुंडली में नीच का शनि अगर आठवें भाव में हो तो जातक निश्चित करोड़पति बनता है। कन्या लग्न में कुंभ राशि छठे भाव में है और अगर शनि आठवें भाव में होगा तो वो विपरीत राजयोग का निर्माण करेगा जिसके प्रभाव से जातक अपने ही शत्रुओं के धन से करोड़पति हो जाता है। 

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तुला लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि अत्यंत शुभ और योगकारक होता है। मूल त्रिकोण राशि पंचम में होने के कारक ये व्यक्ति को शिक्षा और ज्ञान दोनों देते है। अगर शनि और शुक्र की युति केंद्र या त्रिकोण में हो तो जातक उच्च कोटि का व्यापारी होता है। 

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वृश्चिक लग्न -इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि अकारक ही माना गया है। लग्नेश मंगल के साथ वो सहज नहीं है वहीं पराक्रम भाव के स्वामी है। इस लग्न की कुंडली में अगर शनि चौथे भाव में बलवान होकर बैठे तो शश: राजयोग बनता है जो की अच्छी संपत्ति का भोग देता है। 

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धनु लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि सामान्य होता है। अगर शनि और गुरु की स्थिति ठीक है तो जातक धनी होता है। शनि इस लग्न कुंडली के लिए पराक्रम भाव का स्वामी होता है इसलिए जातक को मेहनत से ही सब कुछ प्राप्त होता है। 

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मकर लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि राजयोग कारक है क्योंकि यह खुद शनि का लग्न है। इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि कई प्रकार के राजयोग का निर्माण करता है। फलित के अनुसार अगर मकर लग्न की कुंडली के धन भाव में गुरु शनि बुध हो तो ऐसा जातक विदेश में खूब संपत्ति अर्जित करता है। 

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कुंभ लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि अति शुभ है ,अगर इस लग्न कुंडली में शनि 3, 6, 11 भाव में किसी पाप ग्रह से दृष्ट होकर नहीं बैठा हो तो जातक को अपनी मेहनत के दम पर करोड़पति बना देता है। अगर शनि, गुरु या शुक्र के साथ युति करे तो हर काम में लाभ देता है और उच्च कोटि का ज्ञानी बनाता है।
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राशि
मीन लग्न - इस लग्न कुंडली के जातकों के लिए शनि बारहवें भाव का फल अधिक करने के कारण सामान्य शुभ है। अगर मीन लग्न में शनि की स्थिति अशुभ हो तो जातक को रोग होता है और उसे धन की हानि होती है। इस लग्न कुंडली में शनि लाभ का स्वामी होने के कारण जातक को लाभ देते है लेकिन उसके लिए शनि का बलवान होना आवश्यक है। 
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