वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों के गोचर करने से कई तरह के शुभ और अशुभ योगों का निर्माण होता है। जब एक या एक से ज्यादा ग्रह किसी एक राशि में ही गोचर करते हैं तो ग्रहों की युति के कारण कई तरह के योग बनते हैं। कुछ ऐसा ही योग इस समय बना हुआ है। आपको बता हैं कि मंगल 20 अक्तूबर से अपनी नीच राशि कर्क में प्रवेश कर चुके हैं। ज्योतिष में मंगल ग्रह को सभी ग्रहों में सेनापति का दर्जा हासिल हैं। मंगल युद्ध, उन्माद, सेना, साहस और पराक्रम के कारक हैं। जब-जब मंगल का राशि परिवर्तन होता है तो इसका व्यापक असर देश-दुनिया और जातकों के जीवन पर पड़ता है।
मंगल के कर्क राशि में प्रवेश करने से राहु के साथ नवपंचम नाम का राजयोग बन गया है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कुंडली में पंचम भाव का स्वामी नवम भाव में और नवम भाव का स्वामी पंचम में हो तो नवपंचम राजयोग का निर्माण होता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में नवपंचम राजयोग को बहुत ही शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। आपको बता दें कि मंगल का कर्क राशि में प्रवेश करने से और मीन राशि में पहले से मौजूद राहु संग नवपंचम राजयोग बना हुआ है। ऐसे में एक दूसरे से पाचवें और नौवें भाव में होने से कुछ राशि के जातकों को अच्छा फायदा मिलने के संकेत हैं। आइए जानते हैं मंगल- राहु से बना नवपंचम राजयोग किन-किन राशि वालों के लिए लाभकारी साबित होगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।