सभी ग्रहों में सबसे ज्यादा शुभ फल देने वाले और सौम्य ग्रह बृहस्पति अब 9 अक्तूबर 2024 को मिथुन राशि में वक्री हो गए हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु को अच्छे गुण प्रदान करने और भाग्य का निर्धारण करने वाला ग्रह माना गया है। गुरु ग्रह संतान, शिक्षा, ज्ञान, धन और धार्मिक कार्यों के कारक होते हैं। ज्योतिष में गुरु ग्रह को शुभ और मांगलिक कार्यों का ग्रह भी माना गया है। कुंडली में गुरु ग्रह की शुभ स्थिति स्थिति से जातक को अपार धन संपदा, संतान सुख, सुखी वैवाहिक जीवन, परिवार और समाज में अच्छा मान-सम्मान मिलता है। गुरु को मीन और धनु राशि का आधिपत्य यानी स्वामी माना गया है। कुंडली के अलग-अलग भावों में गुरु की स्थिति का फल जातकों के जीवन पर पड़ता है। गुरु अब मिथुन राशि में वक्री अवस्था में हैं ऐसे में आइए इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं कि सभी 12 राशियों पर पर गुर के वक्री का क्या प्रभाव होगा।
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मेष राशि
मेष राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति नौवें और बारहवें भाव के स्वामी हैं। गुरु मिथुन राशि में वक्री होकर आपकी राशि में तीसरे यानी पराक्रम भाव में हैं, ऐसे में आपको अपने साहत और पराक्रम के चलते लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। करियर में बदलाव देखने को मिल सकता है। धन लाभ के अवसरों में वृद्धि के संकेत हैं।
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वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए देवगुरु बृहस्पति आठवें और ग्यारहवें भाव के स्वामी हैं। गुरु का वक्री मिथुन राशि में दूसरे भाव में हुआ है। ऐसे में आपके खर्चों में बढ़ोतरी के संकेत हैं। नौकरी में बदलाव के योग दिखाई दे रहे हैं और व्यापार के लिहाज से मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा।
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मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए बृहस्पति सातवें और दसवें भाव के स्वामी हैं। आपके लिए बृहस्पति का मिथुन राशि में वक्री पहले भाव में हुआ है। ऐसे में आपको खुद पर ज्यादा विश्वास करने का समय है। करियर में ध्यान देने की जरूरत होगी। व्यापार में कुछ अच्छा लाभ हो सकता है, लेकिन आपको ज्यादा धन के लिए लगातार प्रयास करने होंगे।
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कर्क राशि
कर्क राशि के जातकों के लिए बृहस्पति छठे और नौवें भाव के स्वामी होते हैं। बृहस्पति मिथुन राशि में वक्री आपके बारहवें भाव जिसे व्यय और विदेश का भाव कहा जाता है। करियर के लिहाज से गुरु का वक्री होना औसत रहेगा। व्यापार में आपको अपने प्रतिद्वंदियों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। अधिक धन खर्च हो सकते हैं।
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सिंह राशि
सिंह राशि के जातकों के लिए बृहस्पति आपके पंचम और अष्टम भाव के स्वामी हैं। बृहस्पति का मिथुन राशि में वक्री ग्यारहवें भाव में हुआ है। आपको अचानक धन लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। करियर में आपको नए मुकाम हासिल होंगे। नौकरी में बेहतर अवसरों का प्राप्ति होगी। प्रेम और वैवाहिक जीवन के लिहाज से आने वाला समय आपके लिए अच्छा रहेगा।
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कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए बृहस्पति चौथे और सप्तम भाव का स्वामी होकर दशम भाव में वक्री हुए हैं। ऐसे में करियर में आपको कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार में कोई नई योजना बनाते समय आपको बहुत ही ध्यान देना होगा।
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तुला राशि
तुला राशि के जातकों के लिए धन के कारक ग्रह गुरु तीसरे और छठे भाव के स्वामी होकर नवम भाव में वक्री हुए हैं। आपको भाग्य का अच्छा साथ मिलेगा और पैतृक संपत्ति से लाभ के संकेत हैं। नौकरी में अच्छे अवसर आपके हाथ लग सकते हैं और व्यापार में अच्छा लाभ हासिल करने में कामयाबी मिलेगी। गुरु का वक्री होना आपके आर्थिक जीवन में लगातार बढ़ोतरी के संकेत हैं।
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वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बृहस्पति दूसरे और पांचवें भाव के स्वामी होकर आपके आठवें भाव में वक्री हुए हैं। ऐसे में करियर में कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं जो लोग व्यापार में हैं उनके मुनाफे में कमी और दूसरों से कड़ी टक्कर मिल सकती है। प्रेम जीवन में आपको तालमेल बिठाकर आगे बढ़ना होगा नहीं तो मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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धनु राशि
धनु राशि के लोगों के लिए बृहस्पति पहले और चौथे भाव के स्वामी होकर सातवें भाव में वक्री हुए हैं। ऐसे में आपके हाथ में कुछ अच्छे अवसर मिल सकते हैं लेकिन तनाव के चलते यह निकल भी सकते हैं। साझेदारी के काम में आपको कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए गुरु तीसरे और बारहवें भाव के स्वामी होकर छठे भाव में वक्री हुए हैं। लाभ के अवसरों में वृद्धि होगी। नौकरी में अच्छे अवसर और वेतन में वृद्धि के संकेत हैं। आपको कुछ कामों में लोन आदि ले सकते है जिससे आपके खर्चों में वृद्धि हो सकती है।
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कुंभ राशि
आपके के लिए बृहस्पति दूसरे और ग्यारहवें भाव के स्वामी होकर पांचवें भाव में वक्री हुए हैं। आपको कुछ समय तक जीवन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। करियर के लिहाज से नौकरी में अतिरिक्त दबाव का सामना करना पड़ सकता है। निवेश में आपको मिला जुला परिणाम की प्राप्ति हो सकती है। आपको सेहत के मामलों में ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए संतान कारक देवगुरु बृहस्पति पहले और दसवें भाव के स्वामी हैं। गुरु मिथुन राशि में वक्री होकर आपके चौथे में होगा। ऐसे में आपकी सुख-सुविधाओं में कमी हो सकती है। करियर में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है। धन हानि की संभावना है।