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आपके जीवन के लिए सबसे भाग्यशाली और सबसे कष्टकारी साल कौन सा है जान लीजिए

Tue, 28 Feb 2017 04:49 PM IST
सचिन मल्होत्रा/ज्योतिषशास्त्री
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राश‌िचक्र
भृगु पद्धति ज्योतिष की सबसे रहस्यमय और आश्चर्यजनक शाखा है । महर्षि भृगु द्वारा रचित इस पद्धति में पाराशरी और जैमिनी की भांति दशाओं तथा वर्ग कुंडलियों का अधिक उपयोग न हो कर के ग्रहों के गोचर और उनके आयु वर्षो के आधार पर फलित कहा जाता है। इस विधा में पारंगत भृगु वाचक जातक के भाग्य उदय के वर्ष और जीवन के कठिन समय की दीर्घकालीन भविष्यवाणी मात्र लग्न कुंडली देख कर मिनटों में कर सकता है। इस पद्धति में सूर्यादि ग्रहों के भाग्योदय के वर्ष नियत हैं। सूर्य का फल 22 वर्ष , चंद्र का 24 वर्ष, मंगल का 28 वर्ष , बुध का 32 वर्ष , गुरु का 16 वर्ष, शुक्र का 24 वर्ष , शनि का 36 वर्ष और राहु-केतु का 42 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद मिलता है।
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नौ ग्रह
भृगु पद्धति में शनि, गुरु और राहु-केतु के लग्न से गोचर के अनुसार भी जातक के जीवन के महत्वपूर्ण वर्षो के सम्बन्ध में भविष्यवाणी की जाती है। गोचर में शनि और गुरु मिल कर जिस भाव या उसके स्वामी को प्रभावित करें उस भाव से सम्बंधित फल जातक को मिलते हैं । शनि जब जन्मकालीन सूर्य पर से गोचर करता है तो जातक के कैरियर या व्यसाय में  बड़े बदलाव आते हैं। इस प्रकार शनि का जन्मकालीन गुरु पर गोचर जातक को मान-सम्मान दिला सकता है।
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शन‌ि मंगल
शनि के जन्मकालीन शुक्र पर से गोचर के समय धन ,आभूषण , वाहन और स्त्री का लाभ मिल सकता है । शनि का जन्मकालीन मंगल पर से गोचर चोट और रोग दे सकता है । शनि का जन्मकालीन केतु की राशि पर से गोचर मान हानि और क्लेश दे सकता है । शनि का जन्मकालीन राहु पर से या राहु का जन्मकालीन शनि पर से गोचर बेहद कष्टकारी और जीवन में बड़े परिवर्तनों को लाने वाला होता है।

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बुध ग्रह
इस पद्धति के अनुसार गुरु का जन्मकालीन सूर्य, शुक्र और बुध पर से गोचर बेहद अच्छा माना गया है। किन्तु गुरु का जन्मकालीन राहु पर या राहु का जन्मकालीन गुरु पर से गोचर स्वास्थ्य के लिए कठिन समय हो सकता है । इस प्रकार राहु या केतु का जन्मकालीन शुक्र पर से गोचर जातक की पत्नी को कष्ट दे सकता है । राहु या केतु का जन्मकालीन सूर्य और चंद्रमा पर से गोचर मानसिक पीड़ा देने वाला हो सकता है।
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venus planet
शनि कर जन्मकालीन चंद्र पर से गोचर मानसिक कष्ट का समय हो सकता है ।भृगु पद्धति के अनुसार 30 , 36 , 48 , 60 और 72 वें वर्ष के आसपास जातक के जीवन में बड़े बदलाव आ सकते हैं । 30 वें वर्ष में जन्मकालीन शनि पर से गोचर के शनि, 36 वें वर्ष में गोचर के गुरु और राहु जन्मकालीन गुरु और राहु पर 48 वें वर्ष में गोचर के गुरु के 4 चक्र , 60 वें वर्ष में शनि के 2 तथा गुरु के 5 चक्र और 72 वें वर्ष में गुरु के 6 चक्र और राहु-केतु के 4 चक्र पुरे होने पर जातक के जीवन में शुभ-अशुभ परिवर्तन आते हैं। यह परिवर्तन दशा के अनुसार विस्मयकारी और आश्चर्यजनक भी हो सकते हैं।
https://astrologicalmusings.com/
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