फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोजाना कुछ समय करें इन पंचदेवों की पूजा, धन-धान्य, खुशहाली से भरा रहेगा आपका घर

Wed, 17 Nov 2021 11:54 AM IST
शशि सिंह ज्योतिष, डेस्क अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
पंच देव पूजन विधि व आराधना मंत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
हिंदू धार्मिक ग्रंथों में विभिन्न देवी-देवताओं के बारे में वर्णन मिलता है। इन सभी देवी-देवताओं की पूजा-पाठ का विशेष महत्व माना जाता है। सभी देवताओं की अलग पूजा पद्धति के बारे में भी जिक्र मिलता है। इन सभी देवों में पांच मुख्य देव बताए गए हैं, जिन्हें पंच देव  कहा जाता है। हर मांगलिक कार्य में इन पंचदेवों का पूजन अवश्य किया जाता है। यही पंचदेव पंच तत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इन पंचदेवों का नियमित रूप से पूजन करने से सभी कार्य बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो जाते हैं। यदि रोजाना के पूजा-पाठ में नियमित रूप से इन पंचदेवों की आराधना की जाए तो जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली व धन-धान्य का आगमन होता है। तो चलिए जानते हैं कि कौन हैं पंचदेव और इनकी आराधना व मंत्र के बारे में।
विज्ञापन

2 of 7
पंचदेव पूजन (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
कौन हैं पंचदेव
हिंदू धर्म में किसी भी मांगलिक कार्य में पंचदेव की पूजा का विधान है। प्रत्येक मांगलिक कार्य व पूजन-अनुष्ठान में पंचदेव का पूजन अवश्य किया जाता है। इन पंचदेवों में सर्वप्रथम पूजनीय भगवान गणेश का पूजन होता है, मां दुर्गा, भगवान शिव, जगत पालनकर्ता श्री हरि विष्णु और प्रत्यक्ष देव सूर्य नारायण भगवान का पूजन किया जाता है। जहां भगवान गणेश को जल तत्व, शिव जी को पृथ्वी तत्व, विष्णु जी को वायु तत्व, सूर्य देव को आकाश तत्व और देवी दुर्गा को अग्नि तत्व माना गया है। 
 
विज्ञापन

3 of 7
भगवान गणेश पूजन आराधना मंत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
भगवान गणेश-
इन्हें सभी देवों में प्रथम पूजनीय का वरदान प्राप्त है। इसलिए हर कार्य में सर्वप्रथम गणेश जी का ध्यान व आराधना की जाती है। इनके पूजन से आरंभ किया गया कार्य बिना किसी विघ्न के पूर्ण हो जाता है। इसलिए इन्हें विघ्नहर्ता और विघ्नविनाशक भी कहा जाता है। भगवान गणेश का पूजन करते समय सिंदूर, मोदक या लड्डू और दूर्वा की गांठे अवश्य अर्पित करनी चाहिए। प्रतिदिन गणेश जी के इस मंत्र का जाप करने से उनकी कृपा प्राप्त होती है व आपके जीवन से सभी विघ्न बाधाएं दूर हो जाती हैं।

गणेश गायत्री मंत्र-
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात।।

 

4 of 7
भगवान विष्णु पूजा आराधना मंत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भगवान विष्णु-
भगवान विष्णु इस जगत के पालन हार हैं। धार्मिक मान्यतानुसार, इनकी पूजा से घर में सुख-शांति व सौभाग्य का आगमन होता है व आपके जीवन के सभी दुखों का नाश होता है। भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इनकी पूजा में पीली चीजों का प्रयोग करना चाहिए। जैसे पीले पुष्प, पीले मिष्ठान, पीले वस्त्र, पीला भोजन व पीला तिलक आदि। भगवान विष्णु  की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

विष्णु गायत्री महामंत्र- ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।।
                            वन्दे विष्णुम भवभयहरं सर्व लोकेकनाथम।
विज्ञापन

5 of 7
मां दुर्गा पूजा आराधना मंत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
देवी दुर्गा-
मां दुर्गा को प्रकृति कहा गया है। ये आदिशक्ति स्वरूपा हैं। इनकी पूजा से साधक के सभी कष्ट, विघ्न-बाधाएं दूर हो जाते हैं। मां दुर्गा की आराधना करने से साधक को आत्मविश्वास व सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा की पूजा में लाल रंग की चीजें जैसे श्रंगार का सामान, लाल चुनरी, लाल फूल, कुमकुम और नारियल आदि अर्पित करना चाहिए। इनका पूजन करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए।

मां दुर्गा मंत्र- या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता, 
                नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
विज्ञापन

6 of 7
भगवान शिव पूजन आराधना मंत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
भगवान शिव-
भगवान शिव देवों के देव हैं। धार्मिक मान्यता अनुसार, इनकी आराधना से सब संभव हो जाता है। भगवान शिव के विषय में उल्लेख मिलता है कि यदि श्रद्धा भाव से इन्हें केवल एक लोटा जल और बिल्वपत्र अर्पित कर दिया जाए तो भी ये प्रसन्न हो जाते हैं और अपने भक्तों के सभी कष्ट, रोग-दोष आदि को हर लेते हैं। शिव जी की पूजा में मुख्य रूप से बिल्व पत्र,चंदन, धतूरा गंगाजल व दूध आदि चीजें अर्पित की जाती हैं। शिव जी की पूजा करते समय उनके इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु का भय भी दूर हो जाता है।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्,
उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
सूर्य देव पूजन आराधना मंत्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : istock
सूर्य देव-
पंचदेवों में सूर्य देव एक मात्र ऐसे देवता है, जिनके दर्शन हम प्रतिदिन प्रत्यक्ष रूप से कर सकते हैं। सनातन धर्म में नियमित रूप से सूर्य की साधना करना का विशेष महत्व माना गया है। जातक को प्रतिदिन तांबे को लोटे में जलभरकर उसमें सिंदूर, अक्षत और लाल फूल डालकर उगते सूर्य को जल देना चाहिए और इस मंत्र का जप करना चाहिए।

सूर्य देव को अर्घ्य देते समय करें इस मंत्र का जाप- 'ऊँ सूर्याय नम:'

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें