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ज्योतिष: आपको भारी मुसीबत में डाल सकते हैं कुंडली में बनने वाले ये पांच योग, जानें उपाय

Fri, 30 Apr 2021 08:29 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुंडली में अशुभ योग - फोटो : अमर उजाला
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारी कुंडली में ग्रहों की स्थिति के कारण शुभ-अशुभ योग बनते हैं। जहां शुभ योग के कारण हमें उसके लाभकारी परिणाम प्राप्त होते हैं तो वहीं अशुभ योग के कारण हमें उसके बुरे परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं। हमारी कुंडली में बनने वाले कुछ अशुभ योग हमारे जीवन को संकट में डाल सकते हैं। इनके प्रभाव से हमें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं कुछ अशुभ योगों के परिणाम और उनसे बचने के ज्योतिषीय उपाय के बारे में।
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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
चांडाल योग
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में गुरु बृहस्पति के साथ राहु बैठा हो तो, दोनों की युति से कुंडली में चांडाल योग बनता है। चांडाल योग से व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके प्रभाव से ऋण में बढ़ोतरी होती है। 


उपाय: इस योग की शांति के लिए गुरु बृहस्पति की शांति के उपाय करने चाहिए। गुरुवार के दिन पीली चीजों का दान करना इस योग का एक निवारण है।
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षडयंत्र योग - फोटो : Pixabay
षड्यंत्र योग
लग्न भाव का स्वामी (लग्नेश) अगर अष्टम भाव में बिना किसी शुभ ग्रह के हो तो कुंडली में षड्यंत्र योग का निर्माण होता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में यह योग होता है उसकी धन-संपत्ति नष्ट होने की आशंका रहती है। इस योग के चलते कोई विपरीत लिंग का जातक इन्हें भारी मुसीबत में डाल सकता है। 

उपाय: इस योग से बचने के लिए भगवान शिव की आराधना करें। 

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चंद्र ग्रह - फोटो : Pixabay
केमद्रुम योग
जब कुंडली में चंद्रमा किसी भाव में अकेला बैठा हो, उसके आगे यानि दूसरे और पीछे यानि की बाहरवें स्थान पर कोई ग्रह न हो तो और न ही उस पर किसी ग्रह की दृष्टि पड़ रही हो तो इसे केमद्रुम योग कहते हैं। यह योग व्यक्ति के लिए परेशानी का कारण बनता है। 

उपाय: इस योग को दूर करने के लिए चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान करना चाहिए।
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ग्रहण - फोटो : Social media
ग्रहण योग
किसी भी भाव में चंद्रमा के साथ राहु-केतु बैठे हों तो यह स्थिति कुंडली में ग्रहण योग बनाती है। इस योग के कारण जीवन में अस्थिरता आ जाती है। व्यक्ति नौकरी-व्यापार में अस्थिरता के कारण परेशान रहता है। 

उपाय: इस अशुभ योग के निवारण के लिए जातकों को चंद्र ग्रह की शांति के उपाय करने चाहिए।
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चंद्र ग्रह - फोटो : Pixabay
अल्पायु योग
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा पापी या क्रूर ग्रहों के साथ त्रिक स्थान (छठे, आठवें, बारहवें भाव) पर बैठा हो तो यह स्थिति कुंडली में अल्पायु योग का निर्माण करती है। ऐसे जातक पर सदैव मृत्यु का संकट बना रहता है। 

उपाय: इस दोष से बचने के लिए जातकों को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।
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