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गर्भनाल सुरक्षित रखना है तो यहां आएं

Tue, 05 Mar 2013 08:10 AM IST
गाजियाबाद/गुड़गांव/हरिद्वार/ब्यूरो
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शिशु के जन्म लेने के बाद जिस गर्भनाल को घरों में सुरक्षित रखने या जमीन में गाड़ने की परंपरा रही है, उसे मेडिकल तकनीकी में आए बदलाव के चलते अस्पतालों में सुरक्षित कराने का चलन तेजी से बढ़ा है।
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अकेले गुड़गांव स्थित सेक्टर-37 के स्टेम सेल बैंक में 52 हजार शिशुओं की गर्भनाल (एंबिकल कार्ड) माता-पिता ने सुरक्षित कराई है। माता-पिता को सहूलियत के लिहाज से अस्पताल और स्टेम सेल बैंक आकर्षक पैकेज भी देने लगे हैं।

पैकेज के मुताबिक मात्र 35 रुपये रोजाना जमा कराने पर शिशु का स्टेम सेल सुरक्षित किया जा रहा है। गुड़गांव के क्रायो बैंक्स इंटरनेशनल इंडिया के सीईओ डॉ. सीवी नेरीकार ने बताया कि ऐसे पैकेज देने से इस मेडिकल जरूरत का लाभ आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकेगा।
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21 साल तक एंबिकल कार्ड सुरक्षित रखने के लिए अमूमन दो लाख रुपये का शुल्क अभी तक लगता था, लेकिन एनसीआर में इसके छ: बैंक आने के बाद प्रतियोगिता बढ़ी है। इस कारण अब इसे सुरक्षित कराने के लिए मात्र 75 से 85 हजार रुपये में 21 साल तक गर्भनाल सुरक्षित रखी जा रही है।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि दिल्ली-एनसीआर के स्टेम सेल बैंकों में एंबिकल कार्ड सुरक्षित कराने के लिए आगरा, इलाहाबाद, पानीपत जैसे मझौले शहर के लोग ज्यादा रुचि ले रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों में इन मंझौले शहर के माता-पिता बाकायदा कुछ दिन क्यू लगाकर वेटिंग भी कर रहे हैं।

आगरा के डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने नर्सिंग होम से जिन माता-पिता को एंबिकल कार्ड सुरक्षित कराने के लिए दिल्ली भेजा उन्हें तीन-चार दिन बाद का समय दिया गया है।

सुश्रुत संहिता के मुताबिक शरीर में जितनी भी शिराएं हैं सभी नाभि से जुड़ी रहती हैं। कुछ लोग इसे शगुन के बतौर जमीन में भी गाड़ते हैं। लेकिन मॉडर्न समय में एनसीआर के छ: एंबिकल कार्ड व स्टेम सेल बैंक इसके लिए अस्पतालों के साथ करार कर चुके हैं।

गाजियाबाद के कोलंबिया एशिया अस्पताल के जनरल मैनेजर सुमित प्रसाद ने इसकी पुष्टि की और बताया कि कई अस्पताल इसमें इसलिए रुचि ले रहे हैं क्योंकि इसकी डिमांड बढ़ी हुई है।

गर्भनाल से इन बीमारियों का होता है इलाज
इन स्टेम कोशिकाओं को भौगोलिक रूप से दो अलग-अलग स्थानों पर सुरक्षित रखा जा रहा है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं या दुर्घटनाओं की स्थिति में उनके जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस स्टेम सेल से भविष्य में उस बच्चे के ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया, डायबिटीज, दिल और लिवर समेत करीब 75 बीमारियों का इलाज संभव हो सकता है।

खून का सर्वोत्तम स्त्रोत होती है गर्भनाल
गाजियाबाद। शिशु जन्म के समय करीब 20 इंच लंबी गर्भनाल में लगभग 60 एमएल खून होता है। इसके स्टेम सेल सुरक्षित रखकर इनका उपयोग उस वक्त किया जाता है जब बड़ा होने के बाद बच्चा किसी बीमारी या दुर्घटना का शिकार हो जाता है।

मेडिकल साइंस में यही स्टेम सेल इंजक्ट करके मृत हो चुकी कोशिकाओं की जगह इम्प्लांट कर दिये जाते हैं और बीमारी का उपचार करने में मददगार साबित होते हैं।

भारतीय शुभ मानते हैं गर्भनाल का सुरक्षित रखना
हरिद्वार। सुश्रुत संहिता में गर्भनाल के औषधीय गुणों की बात की गई है, लेकिन आयुर्वेदिक इलाज के रूप में इसका प्रयोग नहीं किया जाता है। पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण ने भी इसकी तस्दीक की।

अलबत्ता अधिकांश माता-पिता अपने बच्चे की नाल को घर में सुरक्षित रखकर बाद में बच्चे के बीमार होने की स्थिति में उसे घिसकर बच्चे को चटा देते हैं। इसे घरेलू नुस्खों की तरह आजमाया जाता है।
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