‘ये इश्क नहीं आसां बस इतना समझ लीजे, एक आग का दरिया है और डूब के जाना है’ जैसे शानदार कलामों के जरिए शायरी की दुनिया में मुरादाबाद को नए मुकाम तक पहुंचाने वाले मशहूर शायर और हरदिल अजीज जिगर मुरादाबादी के नाम से अपने शहर में एक हाल तक नहीं बन सका।
बारह साल पहले जिगर कालोनी में जिगर हाल का निर्माण कराने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया गया था, लेकिन वक्त के साथ वह भी ठंडे बस्ते में चला गया है। हैरानी वाली बात यह है कि जिगर रोड पर जिगर मुरादाबादी नाम का एक पत्थर तक नहीं लगाया गया।
नौ सितंबर यानी बुधवार को जिगर मुरादाबादी की बरसी मनाई जाएगी। बरसी के मौके पर शायरों ने एक बार फिर से जिगर हाल का मुद्दा उठाया है।
शायर कशिश वारसी कहते हैं कि 2002 में शहर के अंदर एक बड़ा मुशायरा हुआ था, जिसमें प्रदेश के तत्कालीन गवर्नर रोमेश भंडारी, भाजपा नेता लालजी टंडन, कांग्रेस नेता माधव राव सिंधिया जैसी हस्तियां मौजूद थीं।