उत्तराखंड में बाढ़ प्रभावितों के लिए सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की हरी झंडी के बाद राहत सामग्री से भरा 100 ट्रकों का काफिला रवाना किया गया था।
अब आ रही खबरों के मुताबिक ये ट्रक अपने नीयत स्थान पर पहुंचने से पहले ही रास्ते में अटक गए हैं। खाने-पीने के सामान और दवाइयों से भरे ये ट्रक तीन दिन से बीच रास्ते अटके हैं और राहत सामग्री के बारिश में भीगने का खतरा बना हुआ है।
इन ट्रकों का डीजल खत्म हो गया है और चालकों का कहना है कि और डीजल डलवाने के लिए उनके पास पैसा नहीं है। मीडिया की मौजूदगी में बड़े जोर-शोर से भेजे गए इन ट्रकों की सुध लेने वाला अब कोई नहीं है।
कांग्रेस को नहीं पता कहां हैं ट्रक?
कांग्रेसी नेताओं को ट्रकों के बारे में कुछ पता नहीं है। कांग्रेस प्रवक्ता संदीप दीक्षित ने एक टीवी चैनल को बताया कि मुझे ट्रकों के बार में कोई जानकारी नहीं है, पर रुद्रपयाग में इन ट्रकों के साथ यूथ कांग्रेस के सदस्य मौजूद हैं।
हालांकि, दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष जेपी अग्रवाल का कहना है कि प्रदेश कमेटी की ओर से ट्रक राहत सामग्री लेकर गंतव्य तक पहुंच गए हैं, लेकिन उन्हें बाकी ट्रकों की जानकारी नहीं है और इस बारे में एआईसीसी से पूछा जाना चाहिए। उन्होंने आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।
बेचनी पड़ेगी राहत सामग्री
ट्रकों के ड्राइवर के मुताबिक उन्हें देहरादून आने के बाद बताया गया की वहां से श्रीनगर जाना है, पर ऊपर की ओर चढ़ते हुए डीजल खत्म हो गया। अब ड्राइवरों के पास पैसे भी नहीं हैं।
चालकों का कहना है कि सरकार या कांग्रेस की तरफ से उनसे कोई संपर्क नहीं किया गया है। उनका कहना है कि अगर यही हालात बने रहे तो वे राहत सामग्री बेचने के लिए मजबूर हो जाएंगे।