कृषि मंत्री ने उत्तराखंड के पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय का स्तर सुधारने और केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने को अपनी प्राथमिकता बताया है।
राधा मोहन सिंह ने कहा कि पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय एक समय में विश्व ख्याति का संस्थान रहा है, जिसकी अब हालत खराब है। राज्य सरकार तीन बरस से स्थाई कुलपति तक तैनात नहीं कर पाई है।
केंद्रीय विवि बनाए जाने के संकेत
उन्होंने पंतनगर विवि को लेकर संकेत दिए हैं कि देश में केवल एक सेंट्रल कृषि विश्वविद्यालय है, जिनकी संख्या बढ़ाकर कृषि अनुसंधान क्षेत्र को सुधारे जाने पर जोर रहेगा।
कृषि मंत्री ने केंद्रीय मृदा एवं जल संरक्षण अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान देहरादून को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने का मुद्दा रखा। उन्होंने बताया कि 1955 में बने संस्थान के पास 130 हेक्टेयर वन भूमि है।
लीज में उलझा है मामला
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) इस संस्थान को वर्ष 2001 में डीम्ड यूनिवर्सिटी बनाने की इच्छा जता चुकी है, लेकिन वन भूमि लीज का मसला फंसा हुआ है।
वन विभाग लीज रिन्यूअल के लिए 33 करोड़ रुपये मांग रहा है, जबकि संस्थान गठन के समय मात्र एक रुपये पर लीज दी गई थी। कृषि मंत्रालय अब इसे वाटरशेड मैनेजमेंट के अनुसंधान के लिए विकसित करना चाहता है।
दूर होंगी अड़चने
डीम्ड यूनिवर्सिटी के लिए जो अड़चने आ रही हैं उन्हें दूर कर संस्थान का अनुसंधान क्षेत्र में दायरा बढ़ाया जाएगा। बतौर कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने पहाड़ी राज्यों के लिए उनका फोकस वहां के प्राकृतिक जल संसाधनों के साथ कृषि भूमि और मौसम के अनुकूल खेती विकसित करने पर फोकस रखा है।