एक एनजीओ द्वारा आंगनबाड़ी वर्कर्स के माध्यम से कराए गए बीमे के पैसे को वापस दिलाने की मांग को लेकर गांव बुढ़ाखेड़ा की सैकड़ों महिलाओं ने चार आंगनबाड़ी केंद्रों में ताला लगा दिया। आक्रोशित महिलाएं कार्यकत्रियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जींद-पानीपत मार्ग पर अवरोधक डालकर बैठ गईं। सूचना पर पिल्लूखेड़ा के नायब तहसीलदार सूरजभान, सफीदों थाना प्रभारी रमेशचंद्र तथा पिल्लूखेड़ा थाना प्रभारी हवा सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारी काफी मशक्कत के बाद महिलाओं को समस्या के समाधान का आश्वासन देकर करीब एक घंटे बाद जाम खुलवाने में कामयाब हो पाए। इस बीच मार्ग पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं। दोपहर करीब 11 बजे हुए इस घटनाक्रम के कारण राहगीर चिलचिलाती धूप में खासे परेशान हुए।
आंगनबाड़ी वर्कर्स के माध्यम से बीमा करवाने वाली ग्रामीण महिला आशा देवी, अंगूरी, रामकली, पिंकी, सुमन, संतोष, कमला आदि ने बताया कि गांव की लगभग 400 महिलाओं ने चार आंगनबाड़ी केंद्रों की इंचार्ज संतोष, कमल देवी, संतोष रानी और कमलेश के मार्फत एक एनजीओ से बीमा करवाया था। महिलाएं आंगनबाड़ी वर्कर्स के माध्यम से हर माह 200-200 रुपये की बीमे की किस्त जमा करवाती थीं। लगभग दो साल तक यह सिलसिला चला, लेकिन वर्ष 2013 में उन्हें पता चला कि जिस एनजीओ से उनका बीमा हुआ है, उसमें बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उक्त आंगनबाड़ी वर्कर्स के विश्वास के कारण उन्हें हजारों रुपये का चूना लगा है। महिलाओं ने कहा कि जब वे आंगनबाड़ी वर्कर्स के घर पर पैसे मांगने के लिए जाती हैैं आंगनबाड़ी वर्कर्स उनके साथ गालीगलौज करती हैं। इसी बात से खफा होकर गांव की सैकड़ों महिलाओं ने गांव के चारों आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला जड़ दिया। इसके बाद गांव के पास जींद-पानीपत मार्ग पर अवरोधक डालकर जाम लगा दिया।
बच्चों का पेट काट कर दिए थे पैसे
गांव बुढ़ाखेड़ा की महिला कमला ने बताया कि वह बेहद गरीब परिवार से संबंध रखती हैं और मजदूरी करके अपनी चार लड़कियों का गुजारा चला रही हैं। कमला ने कहा कि वह अपने बच्चाें का पेट काट कर बीमे की किस्त के पैसे जमा करती थीं। बीमे के पैसे डूबने से उम्मीदों पर पानी फिर गया।
पैसे दिलाए जाने पर ही खुलेंगे ताले
ग्रामीण महिलाओं ने कहा है कि आंगनबाड़ी वर्कर्स के कारण ही उन्हें हजारों रुपये का चूना लगा है। इसलिए वह बीमे के पैसे वापस मिलने के बाद ही आंगनबाड़ी का ताला खोलेंगी।
एनजीओ संचालक ने किया है फर्जीवाड़ा
गांव की आंगनबाड़ी केंद्र की इंचार्ज कमलेश ने कहा कि प्रशासन की तरफ से उन्हें ग्रामीण महिलाओं के बीमे करने के निर्देश मिले थे। प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश पर ही महिलाओं के बीमे किये थे। बीमे की हर किस्त के पैसे उनके द्वारा हर माह एनजीओ के अधिकारियों के पास जमा करवाए जाते थे, लेकिन एनजीओ के संचालक ने इस योजना में फर्जीवाड़ा किया है। इसमें उनका कोई कसूर नहीं है। इसलिए अब महिलाओं के बीमे की राशि वापस दिलवाने के लिए प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए। कमलेश ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला बंदी से उन्हें बहुत परेशानी हुई, क्योंकि बच्चों का पका-पकाया खाना आंगनबाड़ी केंद्र में ही बंद रह गया।