क्लास शुरू होते ही शिक्षक का पहला वाक्य होता ..मुर्गा बन जाओ। डरी हुई आवाज निकलती थी मैं? पलटकर जवाब मिलता और नहीं तो क्या मैं। ये वाक्य सुनते और मुर्गा बनते-बनते कब 12वीं पास कर स्कूल से निकल गया, पता ही नहीं चला।
बाल विद्या मंदिर सीनियर सेकेंड्री स्कूल में आयोजित पूर्व छात्र सम्मेलन में आशीष सक्सेना ने अपनी याद साझा की तो सभी की हंसी निकल गई। स्कूल का पूर्व छात्र सम्मेलन रविवार को धूमधाम से मनाया गया।
इस अवसर पर पूर्व छात्र एसोसिएशन ने अपने टीचर्स को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन 1968 में स्कूल के पहले बैच के छात्र रहे मुरलीधर आहूजा और स्कूल के वर्तमान प्रिंसिपल आरके पांडेय ने किया।
कार्यक्रम में पूर्व छात्रों ने अपनी खट्टी-मीठी यादें साझा कीं। पूर्व छात्र एसोसिएशन केे सदस्य राकेश भार्गव ने कहा कि उस समय अगर किसी भी छात्र से सबसे ज्यादा डर लगता था तो वो थीं उनकी टीचर सरिता जोशी।
1992 बैच के छात्र विनय गुप्ता ने उन दिनों की याद करते हुए बताया कि किस प्रकार गेम्स पीरियड में पंचतंत्र की कहानी पढ़ते हुए टीचर एसएल कटियार ने उनकी जमकर धुनाई की थी।
भारतीय सेना में तैनात आनंद स्वरूप कार्यक्रम में भाग लेने मणिपुर से विशेष रूप से लखनऊ आए हुए थे। उन्होंने बताया कि उस दौरान टीचर्स प्यार भी बहुत करती थीं पर शैतानी करने पर मार भी बहुत पड़ती थी।
इस पर एल्यमुनाई एसोसिएशन ने पूर्व टीचर्स अर्चना मिश्रा, इंदु सिंह, आशा भार्गव, चंद्रा पांडेय, सरिता जोशी, ममता श्रीवास्तव, अंजू दुबे, जे. जोजफ, यू. खन्ना, ग्रेस चंद्रा, गीता सिंह और शोभा मुखर्जी को सम्मानित किया। वर्तमान स्टूडेंट्स ने सीसीई पर आधारित मॉडल और प्रोजेक्ट्स की प्रदर्शनी लगाई।