गुजरात में 2002 में हुए दंगों के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुए पत्राचार का खुलासा नहीं हो सकेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने इसकी जानकारी सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है।
आरटीआई में मांगा था जवाब
एक आरटीआई के जवाब में पीएमओ ने पारदर्शिता कानून की धारा 8(1)(एच) का हवाला देते हुए पत्रों को सार्वजनिक करने से मना कर दिया है।
इस धारा के तहत उस जानकारी को साझा करने से छूट हासिल है, जिससे जांच की प्रक्रिया या फिर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने में बाधा आने की आशंका हो।
गोधरा कांड के बाद भड़के दंगों में करीब 2000 लोग मारे गए थे। पीएमओ के इनकार करने से ये सवाल खड़े हो सकते हैं कि क्या वाजपेयी और मोदी के बीच हुए पत्राचार में दंगाइयों या फिर दंगों में शामिल लोगों के बारे में कोई उल्लेख किया गया था।
आरटीआई आवेदक ने गुजरात में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर 27 फरवरी 2002 और 30 अप्रैल 2002 के बीच पीएमओ और गुजरात सरकार के बीच हुए सभी संवाद और पत्राचार की कॉपी की मांग की थी।
गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद भड़के गुजरात दंगों के चलते वाजपेयी ने मोदी को राजधर्म निभाने की बात कही थी।
हालांकि मोदी ने वाजपेयी की इस सलाह पर कहा था कि वह राजधर्म का ही पालन कर रहे हैं। हाल में राजस्थान विधानसभा चुनाव के दौरान 21 नवंबर को जयपुर में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वाजपेयी के राजधर्म वाले बयान के सहारे मोदी पर हमला बोला था।
मोदी का नाम लिए बगैर सिंह ने कहा था कि भाजपा के उक्त मुख्यमंत्री कई आरोपों का सामना कर रहे हैं और उनकी ही पार्टी के पूर्व पीएम ने एक बार उनसे राजधर्म का पालन करने को कहा था।
प्रधानमंत्री के जवाब में ही मोदी ने ग्वालियर की रैली में कहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी ने हमें राजधर्म का पालन करना सिखाया और हमने किया। इसलिए भाजपा सरकारों की वाहवाही हो रही है।