2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी सिंघल को मनरेगा योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 11 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। उनके पास झारखंड खनन सचिव का पदभार था और गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।
मनी लॉन्ड्रिंग (धनशोधन) मामले में झारखंड की निलंबित आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल और अन्य की 82.77 करोड़ रुपये की संपत्ति को प्रवर्तन निदेशालय जब्त करेगा। ईडी ने गुरुवार को इस कार्रवाई के बारे में जानकारी दी। निदेशालय ने कहा कि संपत्ति जब्त करने के आदेश की पुष्टि मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के निर्णायक प्राधिकरण ने कर दी है।
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कानून के अनुसार, प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के निर्णायक प्राधिकरण के अनंतिम आदेश की पुष्टि करने के बाद एजेंसी अटैच की गई संपत्तियों को जब्त कर सकती है। जिन संपत्तियों को जब्त करने की पुष्टि की गई है, वे 82.77 करोड़ रुपये की हैं और पीएमएलए के प्रावधानों के तहत पिछले साल 1 दिसंबर को ईडी ने अस्थायी रूप से अटैच की थीं। संपत्तियों में ‘पल्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल’ नामक सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल, ‘पल्स डायग्नोस्टिक एंड इमेजिंग सेंटर’ नामक डायग्नोस्टिक सेंटर, उनके संयंत्र और मशीनरी और रांची में स्थित दो भूमिखंड शामिल हैं।
2000 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी सिंघल को मनरेगा योजना में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में 11 मई को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार किया था। उनके पास झारखंड खनन सचिव का पदभार था और गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। सिंघल अभी न्यायिक हिरासत में हैं और रांची में होटवार जेल में बंद हैं।
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एजेंसी ने उसके परिसरों पर छापेमारी भी की थी। मामले में व्यवसायी पति और एक चार्टर्ड एकाउंटेंट भी शामिल थे। उन्हें राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया था।