इस तरीके से पकड़े जाएंगे आरोपी
- फोटो : pexels.com
सी-मैक के जरिए घटनास्थल पर बने किसी भी वीडियो का मिलान पुलिस क्राइम डाटा से तुरंत सम्भव होगा। डॉ. गुप्ता के मुताबिक, मान लीजिए वीडियो में हजारों आदमी हैं, तो उन सबका पता कैसे लगाया जाए। अगले साल से यह संभव हो जाएगा। सी-मैक में देश के हर छोटे-बड़े अपराधी का डाटा और उनके फोटो मौजूद रहेंगे। वारदात से जुड़ी अगर कोई क्लिप, फुटेज या वीडियो है तो उसमें मौजूद सभी लोगों की जानकारी उनके चेहरे से पता चल जाएगी।
जो कोई भी व्यक्ति यदि पहले किसी भी तरह के अपराध में शामिल रहा है, जेल गया है, कोर्ट से लताड़ लगी है, किसी मामले में आरोपी है आदि, तो कम्प्यूटर स्क्रीन पर उसके चेहरे के सामने अलर्ट दिखेगा। यह सब जानकारी पुलिस जांच में रामबाण का काम करेगी। चेन स्नैचर, वाहन चोर गिरोह, लूटमार गिरोह, बैंक फ्रॉड, कॉल सेंटर के जरिए लोगों को चूना लगाने वाले गिरोह, इन सबका पता लगाना आसान हो जाएगा। इनका फोटो बता देगा कि इन्होंने पहले कहां, कब और किस राज्य में वारदात की है।
सी-मैक में यह सब शामिल रहेगा
एफआईआर, क्राइम डिटेल, कोर्ट सरेंडर फॉर्म, प्रॉपर्टी सर्च और जब्त, अपील फॉर्म का नतीजा, मिसिंग पर्सन डिटेल, अन-आइडेंटिफाइड पर्सन रजिस्ट्रेशन, आइडेंटिफाइड डेड बॉडी, गैंग प्रोफाइल फॉर्म, गैंग क्रिमिनल ऐक्टिविटी एंड मेंबर फॉर्म, लॉस्ट प्रॉपर्टी डिटेल, मेडिको लीगल केस, फॉरनर रजिस्ट्रेशन फॉर्म, मिसिंग वीकल, प्रोक्लेम अफेंडर, फिंगर प्रिंट अनालिसिस, रिक्वेस्ट फॉर लुकआउट सरकुलर, लेटर रोगेटरी रिक्वेस्ट, समन वारंट, जेल डिटेल, आर्म्स लाइसेंस, रिट पेटिसन, सीनियर सिटिजन, सिंगल वुमन, ड्रग पेड्लर, सेक्स अफेंडर और विलेज क्राइम डिटेल आदि जानकारी शामिल रहेगी।