उमरिया जिले के चंदिया क्षेत्र में जमीन दिलाने के नाम पर करीब 8 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने का मामला सामने आया है। चंदिया निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक उमरिया को लिखित शिकायत देकर प्रमोद तिवारी और उसके भाइयों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के नाम पर उससे रकम ली गई, लेकिन भुगतान के बाद भी जमीन उसके नाम नहीं कराई गई।
शिकायतकर्ता दीपक कुमार बर्मन के अनुसार, चंदिया क्षेत्र के बड़वार हार में करीब 2.27 एकड़ जमीन दिलाने की बात तय हुई थी। जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए वर्ष 2024-25 के दौरान अलग-अलग समय पर ऑनलाइन माध्यम और चेक के जरिए करीब 8 लाख रुपये का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि रकम देने के बाद उसे उम्मीद थी कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर जमीन की रजिस्ट्री उसके नाम कर दी जाएगी।
आरोप है कि रकम प्राप्त करने के बावजूद संबंधित लोगों ने जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई। काफी समय बीतने के बाद जब शिकायतकर्ता ने जमीन की रजिस्ट्री कराने या अपनी रकम वापस करने की मांग की तो मामला कथित तौर पर विवाद में बदल गया।
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पैसे मांगने पर धमकी का भी आरोप
दीपक कुमार बर्मन ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि जब उसने दी गई रकम वापस मांगी तो उसके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज की गई। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि उसे जान से मारने की धमकी दी गई। इस घटनाक्रम के बाद उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर पूरे मामले की लिखित शिकायत की और कार्रवाई की मांग की। शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि जमीन के सौदे से जुड़े दस्तावेज, भुगतान की जानकारी, चेक और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि जमीन की रजिस्ट्री कराने के नाम पर प्राप्त की गई रकम का वास्तव में किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया।
जांच के बाद सामने आएगी तस्वीर
मामले में शिकायतकर्ता ने पुलिस से जांच कर करीब 8 लाख रुपये वापस दिलाने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुलिस स्तर पर जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जमीन के स्वामित्व, प्रस्तावित सौदे, भुगतान और रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच इस मामले में अहम मानी जा रही है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने जमीन खरीदने की उम्मीद में अपनी रकम दी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं होने के कारण उसे आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। अब उसकी मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उसकी रकम वापस दिलाई जाए।